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कितने गड्ढे…

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी
कुशीनगर(उत्तर प्रदेश)

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कितने गड्ढे आजकल,सड़कों पर हर ओर।
चलना मुश्किल हो गया,सुबह रात या भोर।
सुबह रात या भोर,चोट लगने का डर है।
घर से मीलों दूर,सुनो अपना दफ्तर है।
महँगा हुआ इलाज़,और गड्ढे हैं इतने।
मर जाते हर साल,मनुज सड़कों पर कितने॥

कच्ची सड़कों का नहीं,पूछो भाई हाल।
मछली,घोंघे रेंगते,ज्यों हो पोखर-ताल।
ज्यों हो पोखर-ताल,हाल कैसे बतलाऊँ।
सर पर चढ़ता कीच,कहीं भी आऊँ-जाऊँ।
सुने नहीं सरकार,बात यह बिल्कुल सच्ची।
संकट में हैं गाँव,गाँव की सड़कें कच्ची॥

परिचय–वकील कुशवाहा का साहित्यिक उपनाम आकाश महेशपुरी है। जन्म तारीख १५ अगस्त १९८० एवं जन्म स्थान ग्राम महेशपुर,कुशीनगर (उत्तर प्रदेश)है। वर्तमान में भी कुशीनगर में ही हैं,और स्थाई पता यही है। स्नातक तक शिक्षित श्री कुशवाहा क़ा कार्यक्षेत्र-शिक्षण(शिक्षक)है। आप सामाजिक गतिविधि में कवि सम्मेलन के माध्यम से सामाजिक बुराईयों पर प्रहार करते हैं। आपकी लेखन विधा-काव्य सहित सभी विधाएं है। किताब-‘सब रोटी का खेल’ आ चुकी है। साथ ही विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन हो चुका है। आपको गीतिका श्री (सुलतानपुर),साहित्य रत्न (कुशीनगर) शिल्प शिरोमणी सम्मान (गाजीपुर)प्राप्त हुआ है। विशेष उपलब्धि-आकाशवाणी से काव्यपाठ करना है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-रुचि है।

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