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अब तो जागो,सभी छोड़ो सोना-प्रो. खरे

ऑनलाइन कवि सम्मेलन में सुमधुर रचनाओं ने बाँधा समां
मंडला(मप्र)।

अखिल भारतीय भाषा साहित्य सम्मेलन संगठन के तत्वावधान में सुप्रसिध्द कवि प्रो.शरद नारायण खरे मंडला (मप्र)की अध्यक्षता में ऑनलाइन कवि गोष्ठी आयोजित हुई। अध्यक्ष प्रो. खरे का यह सस्वर गीत बेहद सराहा गया-‘अब तो जागो,सभी छोड़ो सोना,तब ही तो मर सकेगा करोना।’
प्रारंभ में सबका स्वागत करते हुए डॉ. जयजयराम आनंद ने कहा-‘कौन कहेगा आज अकिंचन महफ़िल शबरी। दुनिया के कोने-कोने में जिस की महिमा बारी। कलमकार जब निकल पड़े हैं कोरोना को पाठ पढ़ाने,नंदन वन सी क्यों ना हँसेगी दुनिया सबरी।’ तत्पश्चात रचनाकारों डॉ. आनंद,मनोज जैन ‘मधुर’,डॉ. आनंद तिवारी आनंद,सुरेश तन्मय,डॉ. वीरेन्द्र प्रताप सिंह, प्रो. खरे एवं नारायण सिंह मौर्य ने बेहतरीन कविताएं सुनाईं।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. खरे ने गोष्ठी को सफल निरूपित किया। डॉ. आनंद ने सभी को धन्यवाद दिया।