वह दिन कब आएगा ?

शशांक मिश्र ‘भारती’ शाहजहांपुर(उत्तरप्रदेश) ************************************************************************************ हम सब साथ-साथ पर सैनिकों के शव कब तक गिनते जाएंगे, वह दिन कब आएगा जब इनकी छाती पर चढ़ तिरंगा फहराएंगे। देश कह रहा बहुत हो चुका अब धैर्य नहीं रख सकते हम हैं- शहादत की परीक्षाएं अनेक दे लीं,परिणाम लेकर कौन आएंगे॥ परिचय–शशांक मिश्र का साहित्यिक उपनाम-भारती हैl … Read more

ऐसा दिन कब आयेगा

शशांक मिश्र ‘भारती’ शाहजहांपुर(उत्तरप्रदेश) ************************************************************************************ आस्तीन में पले साँपों को जब तक न कुचला जायेगा, हम परीक्षायें कितनी दे लें,परिणाम कभी न आयेगा। बैठक चर्चायें बातें खूब हुईं और होती भी रहेंगी मित्रों- माँ-बाप पत्नी बहन भाई न रोये,ऐसा दिन कब आयेगाll परिचय–शशांक मिश्र का साहित्यिक उपनाम-भारती हैl २६ जून १९७३ में मुरछा(शाहजहांपुर,उप्र)में जन्में हैंl … Read more

कब तक गिनते जाएंगे

शशांक मिश्र ‘भारती’ शाहजहांपुर(उत्तरप्रदेश) ************************************************************************************ हम सैनिकों के शव यूँ ही कब तक गिनते जाएंगे, आतंक और आतंकियों को कब सबक सिखलायेंगे। देश कह रहा बहुत हो गया,अब बचा है धैर्य नहीं- ये इनके आकाओं की छाती पर भी तिरंगा फहरायेंगे॥ परिचय–शशांक मिश्र का साहित्यिक उपनाम-भारती हैl २६ जून १९७३ में मुरछा(शाहजहांपुर,उप्र)में जन्में हैंl वर्तमान … Read more

नीति

शशांक मिश्र ‘भारती’ शाहजहांपुर(उत्तरप्रदेश) ************************************************************************************ आज जिधर देखो उधर लोग वोट नीति पुष्ट कर रहे, नीति को गिरा-गिरा स्तर राज को तन्दुरुस्त कर रहे। जिनके लिए आये जिन्होंने है चुना चिन्ता नहीं उनकी- बिजनेस यह है उनका अगली पीढ़ियां सन्तुष्ट कर रहे॥ परिचय–शशांक मिश्र का साहित्यिक उपनाम-भारती हैl २६ जून १९७३ में मुरछा(शाहजहांपुर,उप्र)में जन्में हैंl … Read more

दशहरा

शशांक मिश्र ‘भारती’ शाहजहांपुर(उत्तरप्रदेश) ************************************************************************************ रावण राज कब से कब तक, पुतले जलें। हँसा रावण अपनों की वृद्धि से, इस बार भी। विजयपर्व कब किस-किसका, रावण हँसे। वन में राम घर में कोहराम, कैसा उत्सव। मन का जले अगर रावण तो, हो दशहरा। पुतले जले हैं हँसते रावण, घर हमारे। गुण वृद्धि हम कर सकें … Read more

नवरात्रि

शशांक मिश्र ‘भारती’ शाहजहांपुर(उत्तरप्रदेश) ************************************************************************************ देवी ही देवी, कल्याण है करती मन हो सच्चा। ज्ञानी गुणी हैं, मूढ़ भी बन जाते माँ की कृपा। करो याद तो, निर्भय कर देती हरे गरीबी। सिद्धि दायिनी, शक्ति समन्वय माँ कल्याणी। तुम प्रसन्न, दु:ख-दर्द न रहें धनी विपन्न। देवी अम्बिके, त्रय लोकेश्वरि माँ हम भजते। रोग नाशक, आश्रय … Read more

अपनी बात

शशांक मिश्र ‘भारती’ शाहजहांपुर(उत्तरप्रदेश) ************************************************************************************ हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. मैं, अपनी बात कहता हूँ हिन्दी में, वह अपनी कहते हैं अंग्रेजी में तो दूसरे कहते हैं गुजराती और, मराठी में; सभी कहने में लगे हुए हैं अपनी-अपनी बात, न वह हमारी सुनते और- न हम उनकी सुनते बात, शायद- कोई समझाने वाला भी नहीं, अरे! … Read more

पाक चिल्लाया

शशांक मिश्र ‘भारती’ शाहजहांपुर(उत्तरप्रदेश) ************************************************************************************ देशभक्ति है, परत दर खुली नौटंकी धुली। शोर-शराबा, काम नहीं है आया पाक चिल्लाया। सच का मित्र, वही हो सकता है कष्ट का इष्ट। ढोल की पोल, खोली मोदी-शाह ने पाक न बोल। राहु लगा कि, वायनाड़ चीखता बाढ़ हांलांकि। बाढ़ का देश, हर साल है आती कार्य न वेश। … Read more

सावन है आया

शशांक मिश्र ‘भारती’ शाहजहांपुर(उत्तरप्रदेश) ************************************************************************************ बम-बम भोले, कोई शिव बोले सावन है आया, सिर पे जटा है चंदा की छटा है गंगा को समाया, शिव की शक्ति है मन में भक्ति है, सावन जो लाया, हे ओंकारेश्वर हे महाकालेश्वर सबको है भाया, कालों के हो काल प्रभु महाकाल कष्टों को भगाया, हर-हर गूंजे घर-घर बूझे … Read more

अश्वसेन अब न पालते

शशांक मिश्र ‘भारती’ शाहजहांपुर(उत्तरप्रदेश) ************************************************************************************ कारगिल विजय दिवस स्पर्धा विशेष……….   आज से एक दशक पहले समय वह आया था, दुष्टों की दुष्टता शांत की सुधरो समझाया था। भरत भूमि ने उगले फिर शत्रु पर अंगारे थे, हमारा तिरंगा लह-लहाया वह शव संभाले थे। सत्य अहिंसा मूलमंत्र है पर शिवा भी पाले हैं, जब-जब ओछी … Read more