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असली मुद्दा

अमल श्रीवास्तव 
बिलासपुर(छत्तीसगढ़)

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अभी-अभी बीते चुनाव में,
विजय-पराजय किसकी है।
ऐसी है या वैसी है या,
इसकी है या उसकी है॥

कोई दीदी पास बताता,
कोई फेंकू फेल हुआ।
कोई देख रहा ईवीएम,
कोई कहता खेल हुआ॥

इन सब बातों के चक्कर में,
असली मुद्दा भूल गए।
जनता ने जो कहना चाहा,
उस चाहत को भूल गए॥

मौका दिया आम जनता ने,
उसका भी अहसास करो।
वापस आओ रामराज्य में,
मत ज्यादा उपहास करो॥

अगड़े,पिछड़े,दलित वाद का,
खेल घिनौना बहुत हुआ।
उल्टे-सीधे कानूनों का,
भय दिखलाना बहुत हुआ॥

सबका साथ,विकास सभी का,
फिर यह भेद-भाव कैसा ?
जाति,पंथ,मजहब का सारा,
फिर यह दुष्प्रभाव कैसा ?

तोड़-फोड़ की इन्हीं हरकतों,
ने ही तुमको तोड दिया।
सम्हलो अब भी मौका है,
जो जनमानस ने चोट किया॥

जाति,वर्ग का आरक्षण,
अब और नहीं चल सकता है ।
असली पीड़ित,वंचित,शोषित,
कब तक चुप रह सकता है॥

जाति,वर्ग,का आरक्षण,
आपस में फूट कराता है।
निर्धन ज्यो का त्यों रहता है,
धनिक वर्ग मुस्काता है॥

इतने वर्षों का अनुभव,
क्या नहीं समझ में आया है,
खास-खास,कुछ ही लोगों ने,
इसका लाभ उठाया है॥

नब्बे प्रतिशत से ज्यादा,
जैसे थे वैसे अब भी हैं।
पहले भी थे वोट बैंक वे,
वोट बैंक वे अब भी हैं॥

भूख गरीबी लाचारी के,
नहीं जातिगत रिश्ते हैं।
कितने बालक,वृद्ध,दवाई,
बिना तड़पते रहते हैं॥

क्या अगड़े,क्या पिछड़े निर्धन,
कितना दंश झेलते हैं।
कितनों के घर चूल्हा जलता,
कितनी आहें भरते हैं॥

यही समय की मांग इसलिए,
इस पर पुनः विचार करो।
जो असली हकदार उन्हें,
हक देने का उपचार करो॥

केवल एक जाति है मानव,
मानवता ही एक धर्म।
जियो और जीने दो सबको,
यही धर्म का मूलमर्म॥

सिर्फ आर्थिक पिछड़ेपन का,
कुछ हद तक आरक्षण हो।
कल्याणी,दिव्यांग,यतीमों,
के हित का संरक्षण हो॥

एससी,एसटी,एक्ट हटाओ,
संविधान का मान रखो।
सिविल संहिता लागू करके,
भारत का सम्मान रखो॥

एक देश,कानून एक हो,
इस मुद्दे पर अमल करो।
तुष्टिकरण की नीति छोड़कर,
सबके हित में काम करो॥

संसद में कानून बनाकर,
जनसंख्या कंट्रोल करो।
घृणा,द्वेष फैलाने वाली,
धाराओं को खत्म करो॥

गो माता की रक्षा हित,
गो हत्या पर प्रतिबंध करो।
जुमलेबाजी बहुत हुई अब,
शाश्वत का आहवान करो॥

परिचय-प्रख्यात कवि,वक्ता,गायत्री साधक,ज्योतिषी और समाजसेवी `एस्ट्रो अमल` का वास्तविक नाम डॉ. शिव शरण श्रीवास्तव हैL `अमल` इनका उप नाम है,जो साहित्यकार मित्रों ने दिया हैL जन्म म.प्र. के कटनी जिले के ग्राम करेला में हुआ हैL गणित विषय से बी.एस-सी.करने के बाद ३ विषयों (हिंदी,संस्कृत,राजनीति शास्त्र)में एम.ए. किया हैL आपने रामायण विशारद की भी उपाधि गीता प्रेस से प्राप्त की है,तथा दिल्ली से पत्रकारिता एवं आलेख संरचना का प्रशिक्षण भी लिया हैL भारतीय संगीत में भी आपकी रूचि है,तथा प्रयाग संगीत समिति से संगीत में डिप्लोमा प्राप्त किया हैL इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकर्स मुंबई द्वारा आयोजित परीक्षा `सीएआईआईबी` भी उत्तीर्ण की है। ज्योतिष में पी-एच.डी (स्वर्ण पदक)प्राप्त की हैL शतरंज के अच्छे खिलाड़ी `अमल` विभिन्न कवि सम्मलेनों,गोष्ठियों आदि में भाग लेते रहते हैंL मंच संचालन में महारथी अमल की लेखन विधा-गद्य एवं पद्य हैL देश की नामी पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएँ प्रकाशित होती रही हैंL रचनाओं का प्रसारण आकाशवाणी केन्द्रों से भी हो चुका हैL आप विभिन्न धार्मिक,सामाजिक,साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़े हैंL आप अखिल विश्व गायत्री परिवार के सक्रिय कार्यकर्ता हैं। बचपन से प्रतियोगिताओं में भाग लेकर पुरस्कृत होते रहे हैं,परन्तु महत्वपूर्ण उपलब्धि प्रथम काव्य संकलन ‘अंगारों की चुनौती’ का म.प्र. हिंदी साहित्य सम्मलेन द्वारा प्रकाशन एवं प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री सुन्दरलाल पटवा द्वारा उसका विमोचन एवं छत्तीसगढ़ के प्रथम राज्यपाल दिनेश नंदन सहाय द्वारा सम्मानित किया जाना है। देश की विभिन्न सामाजिक और साहित्यक संस्थाओं द्वारा प्रदत्त आपको सम्मानों की संख्या शतक से भी ज्यादा है। आप बैंक विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉ. अमल वर्तमान में बिलासपुर (छग) में रहकर ज्योतिष,साहित्य एवं अन्य माध्यमों से समाजसेवा कर रहे हैं। लेखन आपका शौक है।