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तुलसीदास

डॉ.एन.के. सेठी
बांदीकुई (राजस्थान)

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महाकवि गोस्वामी तुलसीदास (२४ जुलाई) जयंती स्पर्धा विशेष

सावन शुक्ला सप्तमी,तिथी अमोलक जान।
जन्म लिया इस भूमि पर,तुलसी कवी सुजान॥

सुत थे आत्माराम के,हुलसी जिनकी मात।
ब्रह्म तेज से युक्त थे,सुंदर जिनका गात॥

किया जन्म के साथ ही,राम नाम उच्चार।
नाम रामबोला हुआ,किया जगत उद्धार॥

बचपन बीता कष्ट में,अनुभव मिलाअकूत।
सत्संगति इनको मिली,हुई भक्ति उद्भूत॥

गुरु श्रीनरहरिदास से,प्राप्त किया था ज्ञान।
गोस्वामी कहलाय वो,करे राम का ध्यान॥

संस्कृत हिंदी अरु अवधि,भाषात्रय का ज्ञान।
ग्रंथ विविध तुलसी रचे,पाया जग में मान॥

रामचरित की सृष्टि की,किया जगत उपकार।
रामभक्त तुलसी हुए,भक्तों के आधार॥

त्रिया प्रेम में हो गए,कवि तुलसी आसक्त।
राह दिखाई पत्नि ने,बने राम के भक्त॥

मानस रस का पान कर,हुए पाप से मुक्त।
भक्तिरस की नदी बही,सभी धर्म संयुक्त॥

तुलसी ने हनुमान से,पाया था आशीष।
चित्रकूट के घाट पर,मिले अयोध्याधीश॥

संवत सोलह सो असी,गंगाजी के घाट।
मृत्युलोक को त्याग कर,पाए रूप विराट॥

परिचय-पेशे से अर्द्ध सरकारी महाविद्यालय में प्राचार्य (बांदीकुई,दौसा)डॉ.एन.के. सेठी का बांदीकुई में ही स्थाई निवास है। १९७३ में १५ जुलाई को बांदीकुई (राजस्थान) में जन्मे डॉ.सेठी की शैक्षिक योग्यता एम.ए.(संस्कृत,हिंदी),एम.फिल.,पीएच-डी., साहित्याचार्य,शिक्षा शास्त्री और बीजेएमसी है। शोध निदेशक डॉ.सेठी लगभग ५० राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में विभिन्न विषयों पर शोध-पत्र वाचन कर चुके हैं,तो कई शोध पत्रों का अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशन हुआ है। पाठ्यक्रमों पर आधारित लगभग १५ व्याख्यात्मक पुस्तक प्रकाशित हैं। कविताएं विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। आपका साहित्यिक उपनाम ‘नवनीत’ है। हिंदी और संस्कृत भाषा का ज्ञान रखने वाले राजस्थानवासी डॉ. सेठी सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत कई सामाजिक संगठनों से जुड़ाव रखे हुए हैं। इनकी लेखन विधा-कविता,गीत तथा आलेख है। आपकी विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में शोध-पत्र का वाचन है। लेखनी का उद्देश्य-स्वान्तः सुखाय है। मुंशी प्रेमचंद पसंदीदा हिन्दी लेखक हैं तो प्रेरणा पुंज-स्वामी विवेकानंद जी हैं। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-
‘गर्व हमें है अपने ऊपर,
हम हिन्द के वासी हैं।
जाति धर्म चाहे कोई हो 
हम सब हिंदी भाषी हैं॥’