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आराधना

शिवेन्द्र मिश्र ‘शिव’
लखीमपुर खीरी(उप्र)
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शारदीय नवरात्रि का,अति पावन त्यौहार।
आदि भवानी का करो, ‘शिव’ पूजन सत्कार॥

*शैलपुत्री-
शैलसुता के रूप में,प्रथम शक्ति अवतार।
वृषभवाहिनी ‘शिव’ तुम्हें,नमन करे शत बार॥

शैलसुता माँ का करो,निश्छल मन से ध्यान।
माँ प्रसन्न होकर तुम्हें,देगी ‘शिव’ वरदान॥

*ब्रह्मचारिणी-
ब्रह्मचारिणी शक्ति का,दूजा दिव्य स्वरूप।
जग जननी दुख दूर कर, धर कर रूप अनूप॥

दाएं कर माला लिए,और कमण्डल वाम।
सौम्य रूप माँ शक्ति का, तपश्चारिणी नाम॥

*चन्द्रघण्टा-
मातु चन्द्रघण्टा सुनो, ‘शिव’ की करुण पुकार।
दमन दुष्ट का कीजिए,होकर सिंह सवार॥

चन्द्रघण्टिका भाल पर,घण्टाकृति में इन्दु।
रूप तीसरा मातु का,सकल सृष्टि का बिन्दु॥

*कूष्माण्डा-
कूष्माण्डा शिव-शक्ति का,चौथा रूप विशाल।
धारे घट धनु चक्र शर,गदा कमण्डलु माल॥

माता कूष्माण्डा हरे,कष्ट क्लेश जंजाल।
रिद्धि-सिद्धि दे भक्त को,कर दे मालामाल॥

*स्कन्द माता-
मातु-पुत्र सम्बन्ध की,रखी जगत में नीव।
बनी मातु स्कंद की,धन्य धरा के जीव॥

पंचम छवि माँ शक्ति की,कहलाई स्कन्द।
ज्ञान बुद्धि यश दीजिए, मै बालक मतिमंद॥

रुद्राणी,गौरी,सती,सभी आपके नाम।
पंचम् छवि के दरश से,पूरण होते काम।।

*कात्यायनी-
छठा रूप कात्यायनी, ‘शिव’ कुल पालनहार।
शरणागत हर भक्त का,माँ करती उद्धार॥

मनःशक्ति कात्यायनी, मां का षष्टम् रूप।
तृष्णाओं को नष्ट कर,तप फल करें अनूप॥

*कालरात्रि-
कालरात्रि माँ शक्ति का,अद्भुत रुप विशाल।
तीन नेत्र हैं खड्ग कर,ग्रीवा विद्युत-माल॥

रूप भयानक कालिका,कालरात्रि विकराल।
गर्दभवाहन हस्त असि,स्वास अग्नि की ज्वाल॥

*महागौरी-
गौर वर्ण वृषवाहिनी,डमरू हस्त त्रिशूल।
शांतचित्त,मुद्रा अभय,माँ गौरी जग मूल॥

उमा अपर्णा अम्बिका,गिरिजा आर्या नाम।
शिवा,महागौरी,सती,मेटो कष्ट तमाम॥

*सिद्धिदात्रि-
सिद्धिदात्रि ‘शिव’ मातु का,नौवां दिव्य स्वरूप।
पद्म शंख कर चक्र शुभ,गदा सुशोभित रूप॥

रक्ताम्बर पद्मासना,सिद्धिदात्रि माँ अंब।
सकल चराचर की तुम्हीं,एकमात्र अवलंब॥

परिचय- शिवेन्द्र मिश्र का साहित्यिक उपनाम ‘शिव’ है। १० अप्रैल १९८९ को सीतापुर(उप्र)में जन्मे शिवेन्द्र मिश्र का स्थाई व वर्तमान बसेरा मैगलगंज (खीरी,उप्र)में है। इन्हें हिन्दी व अंग्रेजी भाषा का ज्ञान है। जिला-लखीमपुर खीरी निवासी शिवेन्द्र मिश्र ने परास्नातक (हिन्दी व अंग्रेजी साहित्य) तथा शिक्षा निष्णात् (एम.एड.)की पढ़ाई की है,इसलिए कार्यक्षेत्र-अध्यापक(निजी विद्यालय)का है। आपकी लेखन विधा-मुक्तक,दोहा व कुंडलिया है। इनकी रचनाएँ ५ सांझा संकलन(काव्य दर्पण,ज्ञान का प्रतीक व नई काव्यधारा आदि) में प्रकाशित हुई है। इसी तरह दैनिक समाचार पत्र व विभिन्न पत्रिकाओं में भी प्रकाशित हैं। प्राप्त सम्मान-पुरस्कार देखें तो विशिष्ट रचना सम्मान,श्रेष्ठ दोहाकार सम्मान विशेष रुप से मिले हैं। श्री मिश्र की लेखनी का उद्देश्य-हिंदी भाषा की सेवा करना है। आप पसंदीदा हिन्दी लेखक कुंडलियाकार श्री ठकुरैला व कुमार विश्वास को मानते हैं,जबकि कई श्रेष्ठ रचनाकारों को पढ़ कर सीखने का प्रयास करते हैं। विशेषज्ञता-दोहा और कुंडलिया केA अल्प ज्ञान की है। देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार (दोहा)-
‘हिन्दी मानस में बसी,हिन्दी से ही मान।
हिन्दी भाषा प्रेम की,हिन्दी से पहचान॥’