हरिहर सिंह चौहान
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
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छोटे से गाँव देहरिया साहू (जिला देवास) में अपनी शिक्षा, संस्कार व समर्पण में कर्मवीर श्रेष्ठ शिक्षक, जो बच्चों के प्रति सजगतापूर्वक ईमानदारी से शासकीय शाला में अपनापन रखते हुए अपना अव्वल दे रहा था, उनका यूँ चले जाना बहुत आश्चर्यजनक है। विद्यार्थियों की योग्यता का बीज पूर्ण रूप से अंकुरित करने वाले और अपनी लेखनी से इस शब्द साधक कल्याण सिंह राजपूत ‘केसर’ ने ज्वलंतशील समस्याओं के प्रति जागरूकता बरती और पत्र लेखक एवं साहित्यकार के रूप में अपने जिले देवास का नाम रोशन किया। आज उनके निधन से एक खालीपन महसूस हो रहा है, लेकिन उनके दिखाए हुए मार्ग पर छात्र-छात्राओं का भविष्य संवरेगा, उनके साहित्य (कविताएं व लेखों) से भविष्य को लक्ष्य मिलेगा और ‘केसर’ की महक यानी नई रोशनी हम सभी को दिखाईं देगी। स्व. कल्याण सिंह राजपूत ‘केसर’ का सामाजिक व धार्मिक गतिविधियों में भी बहुत सहयोग रहता था। उनके ह्रदयघात से निधन की खबर से आज मन बहुत व्याकुल है। ऐसा कैसे, क्यों ? इतने विराट व्यक्तित्व का इतनी जल्दी चला जाना बहुत दुखद है। आप लिखते थे कि “दीपक भी मानव को मानव बनाने का प्रयास करता है, हमेशा से प्रयासरत रहा। तेल बत्ती और खुद जलकर लोगों के अंधेरे में रोशनी फैलने का प्रयास करता है, मानव परमार्थ के कार्य कर उजड़े हुए घर ग़रीब-अनाथ के जीवन में परमार्थ का कार्य कर रोशनी फैला सकते हैं। आप भावनात्मक ही नहीं, सामाजिक दृष्टिकोण के पारखी थे। उन्होंने अपने शिक्षक धर्म का निर्वहन पूरी निष्ठा व ईमानदारी से किया। कमजोर वर्ग, गरीब, वंचित को उच्च शिक्षा सही रूप से मिले, इस पर भी आपने कई आलेख लिखे। वह बच्चों के जीवन-चरित्र को तो संवारते ही थे, साथ-साथ बुराइयों से दूर रहने की सलाह भी देते थे। उनका मानना था कि मनुष्य को बौद्धिक रूप से सशक्त और मजबूत रहना चाहिए। आप कवि भाव में कहते थे, कि “अपने जब सपनों को उड़ान देते हैं, तब रिश्ते मजबूत होते हैं, क्योंकि दुनिया चाहे जख्म देती रहे, मरहम लगाते ही हैं अपने…।
आप ज्वलंतशील मुद्दों व समस्याओं के प्रति बहुत गहरी बात शासन- प्रशासन व जवाबदार लोगों तक पहुंचाते थे, जो अपने कर्तव्य से विमुख हो रहे हैं। उनके नाम में ‘केसर’ जुड़ा था, इसलिए उनके सदकार्यों की महक पूरी दुनिया में फैली। ऊँचाई पर भी पहुंच कर उन्होंने अपनी जमीं का साथ नहीं छोड़ा। सज्जन, सरल और बहुमुखी प्रतिभा के साथ श्रेष्ठ शिक्षक रूप में अपने-आपको समर्पित किया था। आपने कहीं लिखा था, कि “गुणों को वंदन करता है यह मानव, तो गुणवान, ज्ञानवान, संस्कारवान, आदर्शवान बनकर हमें गुणों की खदान बनना चाहिए। ऐसे विचारों के शुद्ध भाव चरित्र निर्माण के साथ श्रेष्ठ मानव बनने के लिए बहुत उपयोगी है।”
अब यादें शेष, जो है विशेष-
“एक कलम, जो लिखती थी दिल से… वो सदा के लिए शांत हो गई।” मालवांचल के गौरव, प्रसिद्ध साहित्यकार साथी कल्याण सिंह राजपूत ‘केसर’ के आकस्मिक एवं दुःखद निधन पर हम अत्यंत स्तब्ध और शोकाकुल हैं। शिक्षा और साहित्य जगत में आपके अद्वितीय योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।