ममता सिंह ‘विशिष्ट’
धनबाद (झारखंड)
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भीतर का रावण (विजयादशमी विशेष) …
एक तीर भीतर के रावण पर,
बाहर के रावण को बहुत जलाया
अब एक तीर भीतर के रावण पर,
भीतर के लोभ पर तीर चलाना।
भीतर के काम पर तीर चलाना,
भीतर के घमंड पर तीर चलाना।
भीतर के क्रोध पर तीर चलाना,
भीतर की ईर्ष्या पर तीर चलाना।
भीतर के भय पर तीर चलाना,
भीतर के झूठ पर तीर चलाना।
भीतर के मद पर तीर चलाना,
भीतर के द्वेष पर तीर चलाना।
भीतर के मोह पर तीर चलाना,
बस एक बार तुम तीर चलाना।
भीतर के रावण को मार गिराना,
कलयुग में तुम सत्य ही लाना।
कलंक, भय रहित समाज बनाना,
दिल में प्यार और विश्वास बसाना।
बड़ों का सम्मान तुम करना,
छोटों पर प्यार तुम बरसाना।
अन्याय को तुम नहीं सहना,
मुसीबत में तुम नहीं घबराना।
हर मुश्किल में तुम राह बनाना,
हमेशा आगे-आगे बढ़ते जाना॥