जयपुर (राजस्थान)।
कहानी में अभिव्यक्ति की क्षमता कविता से अधिक होती है। कहानी संग्रह ‘आसमानी लतरें’ में कल्पना को विकसित करने का माद्दा अधिक है। इन कहानियों का सूत्र सारगर्भित है, जिसे रितु वर्मा ने अपनी रचना प्रक्रिया में बताया है। इनका लेखन परिपक्व है।
वरिष्ठ साहित्यकार नन्द भारद्वाज ने स्पंदन महिला साहित्यिक एवं शैक्षणिक संस्थान के तत्वावधान में राजस्थान प्रौढ़ शिक्षण संस्थान के सभागार में लेखिका रितु सिंह वर्मा के कहानी संग्रह ‘आसमानी लतरें’ का विमोचन और कृति चर्चा की अध्यक्षता करते हुए यह बात कही। कार्यक्रम का आगाज वर्षा गुप्ता की सुमधुर सरस्वती वंदना से हुआ। स्वागत स्पंदन अध्यक्ष नीलिमा टिक्कू ने किया।
वरिष्ठ व्यंग्यकार फारूक आफरीदी ने कहा कि रितुसिंह वर्मा की कहानियां आधुनिक बोध, नई सोच, नई उड़ान और नवोन्मेष की कहानियां हैं। वे स्त्री शक्ति को नए पंख देती हैं और पारंपरिक चूल्हा चौकी से निकलकर नए क्षेत्रों में प्रवेश कराती हुई खुला आकाश देती हैं।
सुप्रसिद्ध लेखक डॉ. दुर्गा प्रसाद अग्रवाल ने कहा कि कहानी लिखते समय लेखक की अलग मनःस्थिति अलग होती है और पढ़ते हुए पाठक की मनःस्थिति अलग होती है। रितु वर्मा की कहानियों में अनुभवों का कोलाज है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. वीना अग्रवाल ने किताब की समीक्षा करते हुए कहा कि सरल सहज भाषा में कथ्य है, अनावश्यक जटिलता नहीं है। रोचकता से भरपूर सकारात्मक कहानियां हैं।
कथाकार रितु सिंह ने कहा कि जीवन के अनगिनत रूपों में से कुछ रंग लेकर उन्होंने ये कहानियां रची हैं।
कार्यक्रम में स्पंदन सदस्य एस. भाग्यम शर्मा, कविता मुखर, डॉ. कंचना सक्सेना और सोनू यशराज ने भी विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुशीला शील ने किया।