राधा गोयल
नई दिल्ली
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सावन की मदमाती रुत है, खुशियाँ लाई अपार,
सतरंगी रंगों से सारा रंगा हुआ संसार
टेसू और पलाश महकते, मिला ताप से त्राण,
प्रेमी युगलों के मन में मन्मथ ने मारे बाण।
कोई हुआ प्रेम से घायल, कोई युद्ध में घायल,
युद्ध में घायल हैं साजन, तो कैसे बाजे पायल ?
इस जीवन के कैनवास पर अजब गजब से रंग
कुछ दिल को खुश कर देते हैं, कुछ करते बे-रंग।
आज विश्व में जगह-जगह पर युद्ध छिड़ा है,
एक तानाशाह अपनी जिद पर आज अड़ा है
उसके कारण आज महासंग्राम हो रहा,
सारा विश्व खून के आँसू आज रो रहा।
युद्ध में लाखों लोग मर गए, लाखों हो गए बेघर,
कौन सहारा देगा उनको, भटक रहे हैं दर-दर
ज़िंदगी के कैनवास पर खूनी रंग पुता है,
एक तानाशाह कुछ देशों को घुटनों पर लाने को जुटा है।
खून बहाने से क्या होगा ? कोई इन्हें समझाओ,
मनुज जनम अनमोल है, युद्ध की भेंट न इसे चढ़ाओ।
जीवन के इस कैनवास पर प्रीत के रंग सजा लो,
बिना वजह के युद्धों से, संसार को आज बचा लो॥