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जीवन पथ का साथी था…

डॉ. श्राबनी चक्रवर्ती
बिलासपुर (छतीसगढ़)
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पूछे जब तुमसे कोई,
कौन हूँ मैं ?
तुम कह देना
कोई खास नहीं,
शायद एक दोस्त था
कच्चा-पक्का सा,
एक भ्रम था
आधा सच्चा-सा।

जीवन पथ का,
एक साथी था
बातों से अपनी, रातों को,
झिलमिल कर जाता था
गीतों से जी बहलाता था,
खामोश रहकर कभी
पास होने का अनोखा,
एहसास दे जाता था।

लम्बी न सही,
गहरी नींदों में
वो मीठे सपने,
दे जाया करता था।
शुभ रात्रि और सुप्रभात,
के बीच का सुहाना सफ़र
मेरे साथ ही वो बिताता था॥