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दुनिया हुई भक्तिमय

ममता सिंह ‘विशिष्ट’
धनबाद (झारखंड)
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नवरात्री का त्योहार आया, दुनिया सारी भक्तिमय हो गई,
कहीं कलश स्थापना हो रही, मंदिरों में घंटियाँ बज रही।

प्रथम पूजा माँ शैल पुत्री का, अर्पित होते वस्त्र सफ़ेद फूल,
वाहन वृषभ बाएं कर में कमल, पुष्प दाहिने कर में त्रिशूल।

इनके नाम अनेक – पार्वती, हेमवती सती और भवानी,
हिमालय शैल पुत्री भगवान, शिव की ये तो है पत्नी।

दिवतीय पूजा माँ ब्रह्मचारिणी, धारण करतीं वस्त्र श्वेत 
दाहिने हाथ में अक्ष माला, बाएं हाथ में कमंडल है एक।

तप आचरण करने वाली माँ, शिव को पति बनाने की चाह,
चीनी मिश्री या पंचामृत का, भोग लगाने की होती है चाह।

माँ ब्रह्माचारिणी की उपासना, सफ़ेद लाल फूल कुमकुम 
अक्षत घी का दीपक, जला कर माँ को अर्पित करें चन्दन।

तृतीय माँ चन्द्रघण्टा की, साहस बल मिले दूर हो नकारात्मकता,
नाश करती दुष्ट शक्ति,लाती परम शांति कल्याण और सौम्यता।

मस्तक पर अर्ध चंद्र भुजायें इनकी,

हैं दस अस्त्र शस्त्र सुशोभित,

स्वर्ण समान शरीर चमकीला, और कान्तिवान लाल फूल अर्पित।

चौथी माँ कुष्मांडा सृष्टि की, रचना करने वाली देवी माँ,
सवारी इनकी शेर की निवास,सूर्य मण्डल क़े भीतर लोक माँ।

सातों हाथ में धनुष बाण अमृत पूर्ण कलश चक्र गदा,
कमण्डल आठवां हाथ में रिद्धि सिद्धि की जाप माला।

पाँचवी कार्तिकेय की माता स्कन्द माता भी नाम है,
कमल पर विराजमान क़े कारण पद्यमासना भी नाम है।

ज्ञान, समृद्धि, साहस, बल, और संतान सुख की प्राप्ति,
वस्त्र सफ़ेद इनके, जो हैं शांति और शुद्धता का प्रतीक।

छठा माँ कात्यायनी पीले, या सुनहरे वस्त्र शुभ होते,
शहद अत्यंत प्रिय पीले फल, मिठाई बेसन हलवा होते।

चार भुजाएँ माँ की, एक कर में तलवार; दूसरे में कमल,
एक हाथ में वर मुद्रा, दूसरे में मुद्रा, साहस शक्ति अभय।

सातवां दिन भक्तों की आस्था रहती माता कालरात्रि में,
उनकी वाहन गदर्भ, कालरात्रि माँ है काली वर्ण में।

भक्तों का कल्याण करती, नकारात्मकता नाश करती,
शुभंकरी योगिश्वरी महायोगिनी, कालरात्रि कहलाती।

आठवीं माता महागौरी, भोग नारियल और खीर पूरी,
शांति पवित्रता मोक्ष की देवी, भक्तों का कष्ट मिटाती देवी।

माँ दुर्गा का नौवा और, अंतिम स्वरुप माँ सिद्धिदात्रि,
चार भुजाए वाहन सिंह, कमल क़े पुष्प पर आसीन।

मिष्ठान पंचमेवा फलों का भोग, सफ़ेद रंग प्रिय माँ को
अर्धनारीशवर कहलाये, अष्ट सिद्धि प्राप्त हुई शिव को।

आधा शरीर शिव का, आधा शरीर बन गया देवी का,
ॐ सिद्धिदात्रेय नमः, ॐ एम हीं क्लीं सिद्धिदात्रे नमः।

जय माता दी जय माता दी, नारा गूँजता चहुँओर,
जय माता दी सुनकर, दिल का नाच उठे मन मोर॥