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भक्ति की शक्ति का रंग है नवरात्रि पर्व

हरिहर सिंह चौहान
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
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माँ की कृपा के रंग (नवरात्रि विशेष)…

माँ शक्तिशाली शेरावाली, जिसकी स्तुति-पूजा हम सभी करते हैं, इस भक्ति आराधना के महापर्व नवरात्रि पर हम भक्तों पर देवी कृपा का हर रंग का आनंद हमें मिलता रहे। मनुष्य का यह जीवन बिना शक्ति एवं मातृ आराधना के अधूरा ही है, तो सनातन संस्कृति व हिन्दू धर्म की प्रभावना तप, तपस्या, त्याग के बिना कैसे पूरी होगी। शुभ की शुद्धता के साथ जब इस नौ दिवसीय नवरात्रि पावन पर्व की शुरुआत होती है, तो सारे वातावरण में खुशियों को बढ़ाने हेतु माँ एक तरह से सकारात्मकता की ऐसी ऊर्जा प्रज्वलित कर देती है, जिससे समृद्धि और कहीं नहीं जाएं, ना ही प्रकृति कभी नाराज़ हो। यानी ऐसा रंग जीवन में चढ़े, कि हम कभी भी हार ना मानें। पूजा-पाठ से शक्ति स्वरूपा नव दुर्गा माँ हमारी अतंर आत्मा में सुकून व मानसिक शांति प्रदान करती है। नवरात्रि पावन पर्व पर जिस ऊर्जा-स्फूर्ति का हम सभी अनुभव करते हैं, वही तो भक्ति की शक्ति है।
   हमें जीवन में पवित्रता के लिए सादगी व शांति का एहसास करने हेतु हर एक रंग को दुनिया में फैलाना होगा, जिससे हमारे अंदर साहस व आत्मविश्वास बढे। जीवन में सादगी और ईमानदारी के साथ साथ भक्ति की गहराई भरे, इस जीवन रुपी चक्की में मनुष्य जब भी परेशानी, दु:ख-तकलीफ में घिर जाए तो माँ शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि और महागौरी के साथ हम सभी देवी को सच्चे मन से स्मरण करें, तो सारी बाधा दूर हो जाएगी। भक्ति के हर एक रंग में नवरात्रि पर्व हमें सीख देता है कि हमें प्रेम स्नेह और समर्पण से आध्यात्मिकता के इस वैभव को सदियों तक बनाना होगा। हमारी तपस्या, उपवास, भक्ति और आराधना से हमें नौ दुर्गा ऐसी सिद्धी प्रदान करें कि हम कभी भी दुश्मनों के बीच हारे नहीं, जीत की प्रचंड सफलता हमें प्रदान हो।
    वर्तमान में नवरात्रि पर्व में आधुनिकता का कलेवर लग रहा है, लेकिन सनातन संस्कृति, भारतीय सभ्यता और धर्म के प्रति आस्था से मुख्य पूजा-पाठ, भक्ति-आराधना की बात पर हम भक्तजन दिशा नहीं भटकते हैं। गरबा, नृत्य, गीत-संगीत एवं देवी दर्शन से माँ की ममता का गुणगान व भक्ति का हर एक रंग दुनिया में हो, तो इस दौर में भी नवरात्रि का महत्व कभी भी कम नहीं होगा और निश्चित ही हमारी भक्ति की इस शक्ति का हर रंग दुनिया देखेगी।