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संतोष श्रीवास्तव का कथा-लेखन कौशल वैश्विक स्तर का

विमोचन…

भोपाल (मप्र)।

संतोष श्रीवास्तव की २ महत्वपूर्ण कृतियों का उर्दू में प्रकाशित होना हिंदी और उर्दू साहित्य के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि है। ‘ख्वाबों के पैरहन’ २ रचनाकारों के संयुक्त सृजन का उत्कृष्ट उदाहरण है और यह साहित्यिक दृष्टि से ऐतिहासिक महत्व की कृति है। विश्वास है कि इस उपन्यास को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक सराहना मिलेगी, क्योंकि संतोष श्रीवास्तव का कथा-लेखन कौशल वैश्विक स्तर का है।
        यह बात वरिष्ठ साहित्यकार इक़बाल मसूद ने अध्यक्षता करते हुए कही। अवसर बना आकार लिटरेरी एंड कल्चरल सोसाइटी (भोपाल) द्वारा शनिवार की शाम को हिंदी भवन के महादेवी वर्मा सभागार में वरिष्ठ साहित्यकार संतोष श्रीवास्तव की २ पुस्तकों के उर्दू संस्करणों के लोकार्पण एवं उन पर विमर्श आयोजन का। लोकार्पित पुस्तकों में उपन्यास ‘ख्वाबों के पैरहन’ (हिंदी संयुक्त उपन्यास प्रमिला वर्मा के साथ ‘हवा में बंद मुट्ठियाँ’ का उर्दू अनुवाद-डॉ. इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी, प्रयागराज) तथा कहानी संग्रह ‘आसमानी आँखों का मौसम’ (उर्दू अनुवाद डॉ. सबीहा रहमानी और डॉ. मोहम्मद अफ़ज़ल बाँदा) शामिल हैं।
  मुख्य वक्ता के रूप में मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी के क्षेत्रीय निदेशक प्रो. डॉ. मोहम्मद अहसन ने ‘ख्वाबों के पैरहन’ की समीक्षा करते हुए कहा कि यह पाठक से निरंतर संवाद करने वाला सशक्त उपन्यास है। संतोष श्रीवास्तव और डॉ. वर्मा ने मुस्लिम समाज की पृष्ठभूमि को अत्यंत संवेदनशीलता और प्रामाणिकता के साथ प्रस्तुत किया है।
   प्रख्यात उर्दू समीक्षक मेहमूद मलिक ने कहा कि ‘ख्वाबों के पैरहन’ हिंदी के २ प्रतिष्ठित लेखकों द्वारा एकसाथ उपन्यास लिखना चुनौतीपूर्ण कार्य होता है, किंतु दोनों रचनाकारों ने इसे इतनी सहजता से निभाया है कि कहीं भी कथानक का प्रवाह बाधित नहीं होता। उन्होंने कहा कि उपन्यास एक गरीब मुस्लिम परिवार का अत्यंत संवेदनशील चित्र प्रस्तुत करता है।      
    ‘हवा में बंद मुट्ठियाँ’ की समीक्षा करते हुए डॉ. नीलिमा रंजन ने कहा कि यह संयुक्त उपन्यास हिंदी साहित्य में अभिनव प्रयोग है। शीर्षक भी अपने भीतर अनेक अर्थ समेटे हुए है और इसकी केंद्रीय पात्र रेहाना पूरे कथानक की आत्मा है।
    कहानी-संग्रह ‘आसमानी आँखों का मौसम’ पर प्रसिद्ध शायर बद्र वास्ती ने कहा कि संपादन के दौरान उन्हें प्रत्येक कहानी कई बार पढ़ने का अवसर मिला और इन कहानियों के पात्रों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। भाषा अत्यंत सहज है तथा प्रकृति-चित्रण विशेष रूप से आकर्षित करता है। उन्होंने डॉ. रहमानी के अनुवाद-कार्य की सराहना की।
अनुवादक डॉ. सबीहा रहमानी ने अपने अनुभव साझा किए।
    कार्यक्रम के प्रारंभ में आसिम हुसैन फ़ारूक़ी ने सभी अतिथियों एवं साहित्य प्रेमियों का स्वागत किया।
   कार्यक्रम का संचालन करते हुए मुज़फ़्फ़र सिद्दीक़ी ने मुंशी प्रेमचंद की १४६वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की तथा कार्यक्रम उनकी स्मृति को समर्पित किया। सूफ़िया ख़ान ने सभी का आभार व्यक्त किया।