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हिंदी के लिए संघर्षरत अधिवक्ता की कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी

जनभाषा में न्याय का संघर्ष…

आरा (बिहार)।


मैंने हिंदी के लिए संघर्षरत अधिवक्ता को बहुत ध्यान से सुना। मैं आज इस सभा में घोषणा करता हूँ कि इनकी कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी। आप लोग आज ही अपनी डायरी में लिख लीजिए कि इनकी कुर्बानी का अंत हिंदी की जीत में होगा। हिंदी उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों की भाषा बनकर रहेगी।
  हरप्रसाद दास जैन महाविद्यालय आरा के प्रधानाचार्य प्रो.(डॉ.) नरेंद्र कुमार ने हिंदी पखवाड़ा समारोह की अध्यक्षता करते हुए यह बात महाविद्यालय के सभागार में कही। इसमें विशिष्ट अतिथि के तौर पर हिंदी के लिए संघर्षरत अधिवक्ता (पटना उच्च न्यायालय) इंद्रदेव प्रसाद भी उपस्थित रहे। सेवानिवृत्त हिंदी विभागाध्यक्ष  प्रो. (डॉ.) बजरंग प्रताप केसरी के आग्रह पर इस सभा का आयोजन हुआ। खास बात यह है कि हिंदी में दाखिल आवेदन सी.डब्लू.जे.सं. ९७८५/ २०२५ रघु चौहान बनाम बिहार राज्य एवं अन्य का अंग्रेज़ी अनुवाद दाखिल करने का आदेश
२३ सितम्बर २०२६ को ही मुख्य न्यायमूर्ति भी. कामेश्वर राव वाली न्यायखण्डपीठ (पटना उच्च न्यायालय के अनुवादक विभाग को) ने दिए हैं, जिससे प्रधानाचार्य सह सभाध्यक्ष की उक्त घोषणा में लोगों का विश्वास बढ़ा है।

(सौजन्य:वैश्विक हिंदी सम्मेलन, मुम्बई)