पद्मा अग्रवाल
बैंगलोर (कर्नाटक)
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भारत देश की पहचान यहाँ की विविधता, संस्कृति और आपसी भाईचारा है। विविधता के बाद भी जो भावना हम सभी को एक सूत्र में बाँधती है, वह है-भारतीय होने का गर्व या हमारा देश प्रेम। ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना हमें सिखाती है, कि हमारी भाषा, वेशभूषा और जीवन-शैली भले अलग हो, लेकिन हमारा राष्ट्र एक है। इसी विचार को मजबूत करने के लिए भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री और गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है।
स्वतंत्रता मिलने के बाद हमारे देश के सामने कई सारी चुनौतियाँ थीं, देश कई रियासतों में बँटा हुआ था। ऐसी कठिन परिस्थिति में सरदार पटेल ने अपनी राजनीतिक कुशलता, कूटनीतिक समझ और दृढ संकल्प से रियासतों के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों ने भारत को एक मजबूत और संगठित राष्ट्र बनाने में सहायता की।
उनका जीवन हमें सिखाता है, कि यदि इरादे मजबूत हों तो और उद्देश्य देश की भलाई हो, तो कठिन से कठिन परिस्थितियों का भी सामना किया जा सकता है। किसी भी राष्ट्र की शक्ति वहाँ के नागरिकों की एकजुटता होती है, यानी व्यक्तिगत मतभेदों को भुलाकर राष्ट्र हित को महत्व देना जरूरी है।
आज सोशल मीडिया ने लोगों को अपने विचार साझा करने के लिए मंच दे दिया है, लेकिन देखा जा रहा है कि अक्सर गलत सूचनाएं और अफवाहें समाज में तनाव पैदा कर देती हैं। इसलिए हमें किसी भी संदेश और अफवाह पर विश्वास करने या दूसरे के पास भेजने के पहले उसकी सत्यता जाँचनी चाहिए। हमें आपसी मतभेदों तो समझदारी से सुलझाना और दूसरों के विचारों का सम्मान करना चाहिए।
युवा किसी भी देश की ऊर्जा, आशा और भविष्य होते हैं। यदि युवा भेदभाव से दूर रह कर समानता और भाईचारे को अपना लें, तो समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
देश में एकता बनाए रखना केवल सरकार की या किसी एक आदमी की जिम्मेदारी नहीं हो सकती है, वरन् प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। हम सबको अपने अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को भी समझना चाहिए।