राधा गोयल
नई दिल्ली
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चले जाते हो हमसे मोड़ कर मुँह, इस तरह से तुम,
मगर यह याद रखना, तुम हमें न भूल पाओगे।
तुम्हारी याद को दिल में बसा कर, इस तरह रक्खा,
उन्हीं यादों के साये में, ज़िंदगी हम बिताएंगे।
मेरी यादें तुम्हारे दिल से हर्गिज मिट न पाएंगी,
तुम्हें हर पल सताएंगी, तुम्हें हर पल रुलाएंगी।
तुम्हारी खुशियों की खातिर, ये रिश्ता तोड़ डाला है,
तुम्हारे बन्धनों से अब ये नाता तोड़ डाला है।
करूँ किससे ‘शिकायत’, इसलिए लब सी लिये मैंने,
विधाता ने ही जब मेरा नसीब फोड़ डाला है।
जरा-सी बात पर रुसवा किया, तुमने हमें इतना,
पता ये लग गया कि तुमको, हमसे प्यार है कितना।
गलतफहमी तुम्हारी एक दिन जब दूर होगी तब,
बहुत पछताओगे और नींद भी न तुमको आएगी।
बहुत तड़पोगे और आहें भरोगे याद कर करके।
बेकार कर ली जिन्दगी शिकवे ही कर-करके।
हमारे संग गुजारी यादें, तब तुमको रुलाएगी,
कभी तन्हाइयों में जब हमारी याद आएगी॥