दीप्ति खरे
मंडला (मध्यप्रदेश)
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जन -मन का भाव हिन्दी (हिन्दी दिवस विशेष)….
हमारा मान है हिंदी,
हमारा सम्मान है हिंदी
जन-जन की भाषा है ये,
हमारी पहचान है हिंदी।
माँ के आँचल की यह बोली,
मन के भावों की भाषा है
जिसमें अपने सुख-दुख बाँटें,
वह हिंदी हमारी मातृ भाषा है।
लोकगीतों की मधुर तान में,
साहित्य के उजले शब्दों में
भारत की गौरव-गाथा गूँजे,
हिंदी के भाव भरे स्वर में।
यह केवल भाषा नहीं है,
यह संस्कृति का गौरव है
भारत की आत्मा से जुड़ा,
हिंदी का अपना वैभव है।
बोलियों को करके आत्मसात,
तत्सम, तद्भव को अपनाया
दूसरी भाषा के शब्दों को भी,
हिंदी ने प्रेम से गले लगाया।
हर भाषा का मान रहे,
सबका अपना सम्मान रहे
पर मातृ भाषा हिंदी का,
सबसे ऊँचा स्थान रहे।
नई पीढ़ी के कंठों में भी,
हिंदी का ही नाद रहे
ज्ञान-विज्ञान के हर क्षेत्र,
में हिंदी का संवाद रहे।
विश्व पटल पर गूंजे गर्व से,
हिंदी हमारी शान रहे।
हिंदी हमारा मान रहे,
हिंदी का सदा सम्मान रहे॥