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अटल जन्मोत्सव पर कराया कवि-सम्मेलन

नारनौल(हरियाणा)।

संयुक्त भारतीय धर्म संसद (हरियाणा प्रांत-द्वितीय) द्वारा स्थानीय गौड़ ब्राह्मण सभा भवन में महामना मदनमोहन मालवीय और पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेई के जन्मोत्सव पर भव्य कवि-सम्मेलन किया गया। इसमें हरियाणा और राजस्थान के आधा दर्जन विशिष्ट कवियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम के प्रारंभ में मालवीय जी और अटल जी के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि व सिंघानिया विश्वविद्यालय (राजस्थान) में हिंदी-विभाग के अध्यक्ष डाॅ. रामनिवास ‘मानव’ ने कहा कि देश की प्रगति और उत्थान में महामना मदनमोहन मालवीय और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। अध्यक्षता कर रहे धर्म संसद के अध्यक्ष तथा वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश मेहता ने मालवीय जी और वाजपेई जी को सच्चा भारत-रत्न और महान नेता बताते हुए कहा कि देश के सर्वांगीण विकास में उनका महत्त्वपूर्ण योगदान भारतीय इतिहास के पन्नों पर स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा।
डाॅ.सी.एस. वर्मा के कुशल संचालन में चले इस विशिष्ट कवि-सम्मेलन में रेवाड़ी से कवि प्रेमपाल सिंह ने ‘एक थे पंडित महामना जी,दूजे अटल बिहारी थे। दया,धर्म और देश-प्रेम के सबसे बड़े पुजारी थे।’ कहकर मालवीय जी और अटल जी के बहुआयामी व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। रेवाड़ी के ही प्रो. मुकुट अग्रवाल ने अटल बिहारी वाजपेई को लोकतंत्र का नायक,जन-मन का अधिनायक और राष्ट्रवाद का गायक बताते हुए कहा-‘हिंदू तन-मन,हिंदू जीवन का उद्घोष है। अटलबिहारी तो रण का जयघोष है।’ अलवर के ओजस्वी कवि संजय पाठक ने भारत के बदलते हुए इतिहास को कुछ इस प्रकार रेखांकित किया-‘करवट ऐसी ले रहा इतिहास अब तो,आ ही जाएं महामना या अटल कोई। राष्ट्रभक्ति की खिले बगिया निराली,यह पड़ा सदियों से बंजर मांग करता।’ स्थानीय कवि डॉ. महिपाल सिंह, वरिष्ठ कवि प्रमोद वत्स आदि ने भी रचना प्रस्तुत की।
मुख्य अतिथि डॉ. रामनिवास ‘मानव’ के दोहों को भी भरपूर सराहना मिली। उनके दोहे देखिए-‘सूख गई संवेदना,मरी मनों की टीस। अब कोई रोता नहीं,एक मरे या बीस॥
किसी और की आग है,किसी और का तेल। किसी और की झोंपड़ी,किसी और का खेल॥’
इस यादगारी कवि-सम्मेलन में डॉ.आर.के. जांगड़ा, भागीरथ यादव और योगेश कौशिक(रेवाड़ी), aविजय पाल,सुनील गौड़,किशनलाल शर्मा,अजय शर्मा,डॉ.सुनील कुमार आदि की उपस्थिति विशेष उल्लेखनीय रही।

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