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अकादमी द्वारा अखिल भारतीय एवं प्रादेशिक कृति पुरस्कार घोषित

भोपाल (मप्र)।

साहित्य अकादमी (मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग, भोपाल) द्वारा अखिल भारतीय एवं प्रादेशिक कृति पुरस्कार कैलेण्डर वर्ष २०२४ के पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। अखिल भारतीय प्रति पुरस्कार १ लाख ₹ हेतु १४ रचनाकारों का चयन किया गया है। ऐसे ही प्रादेशिक प्रति पुरस्कार ५१ हजार ₹, शाॅल, श्रीफल, स्मृति चिह्न और प्रशस्ति के साथ रचनाकारों को अलंकृत करने के लिए करीब ३० रचनाकारों को चुना गया है।
     अकादमी के निदेशक डाॅ. विकास दवे ने बताया कि अधिकांश पुरस्कारों हेतु २ श्रेष्ठ कृतियों को संयुक्त रूप से जूरी द्वारा चयनित किया गया है। अखिल भारतीय कृति पुरस्कार में – अखिल भारतीय पं. माखनलाल चतुर्वेदी (निबंध) डाॅ. शकुंतला कालरा (दिल्ली) की कृति ‘बच्चे और आप’ एवं अखिलेन्द्र मिश्र (मुम्बई) की कृति ‘अभिनय अभिनेता और अध्यात्म’, अखिल भारतीय गजानन माधव मुक्तिबोध (कहानी) चरणसिंह अमी (इंदौर) की कृति ‘अतुकांत’ एवं डाॅ. पूजा हेमकुमार अलापुरिया (मुम्बई) की कृति ‘कभी पैसा तो कभी किताब’, अ.भा. राजा वीरसिंह देव (उपन्यास) डाॅ. वीणा सिन्हा (भोपाल) की कृति ‘अग्निगर्भ में जलती पंखुरियाँ’ एवं सुयश त्यागी (भोपाल) की कृति ‘छूटते किनारे’, और अ. भा. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल (आलोचना) पवन विजय (गाजियाबाद) की कृति ‘मास्क मैनिफेस्टो’ एवं लहरी राम मीणा (वाराणसी) की कृति ‘सृजन के विविध रूप और आलोचना’ को चयनित किया गया है। इसी क्रम में अ.भा. पं. भवानी प्रसाद मिश्र (गीत एवं हिन्दी ग़ज़ल) सुशील साहिल (गोंडा) की कृति ‘यहाँ सब लोग हँसते बोलते हैं’ एवं शैलेन्द्र पाण्डेय (सरायकेला) की कृति ‘आईने के जाविये’, अ.भा. अटल बिहारी वाजपेयी (कविता) अजीत कुमार पुरी (दिल्ली) की कृति ‘आह्लादित है अयोध्या’ एवं डाॅ. कौशल दुबे (जबलपुर) की कृति ‘तथागत’, कुबेरनाथ राय (ललित निबंध) संजीव शर्मा (भोपाल) की कृति ‘अयोध्या २२ जनवरी’ एवं संजय सक्सेना (राजगढ़) की कृति ‘डायरी का मुड़ा हुआ पन्ना’, विष्णु प्रभाकर (आत्मकथा-जीवनी) पं. कमलकांत शर्मा (दतिया) की कृति ‘शबरी दर्शन’ एवं मनीष कुमार पाटीदार महेश्वर की कृति ‘जिंदगी का सफ़र किशोर कुमार’, निर्मल वर्मा (संस्मरण) रवीन्द्र कुमार दुबे (इंदौर) की कृति ‘एक दुनिया ऐसी भी’ एवं ऋचा दीपक कर्पे (देवास) की कृति ‘यादों का सुनहरा सफर’, महादेवी वर्मा (रेखाचित्र) डाॅ. प्रीति खरे (भोपाल) की कृति ‘नानी का घर ढूँढ़ रही हूँ’ एवं अशोक पटेल (शहडोल) की कृति ‘वनगीता’, प्रो. विष्णुकांत शास्त्री (यात्रा-वृत्तांत)  डाॅ. जितेन्द्र कुमार सोनी (जयपुर) की कृति ‘ओकुहेपा’ एवं डाॅ. शिव कुमार व्यास (जबलपर) की कृति ‘हिंदी में यात्रा वृत्तांत’, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र (अनुवाद) डाॅ. श्रीनिवास शुक्ल ‘सरस’(सीधी) की कृति ‘लोकपुराण’ एवं डाॅ. दंतू मुरली कृष्ण (भोपाल) की कृति ‘जीवन गीता’, नारद मुनि (फेसबुक/ब्लाग/नेट) मनोज जैन मधुर (भोपाल) का पेज ‘फेसबुक/ब्लाॅग/नेट’ एवं कृष्णमुरारी त्रिपाठी ‘अटल’ (रायपुर) सहित का पेज ‘फेसबुक/ब्लाॅग/नेट’ को दिया गया है।
    उन्होंने बताया कि प्रादेशिक कृति पुरस्कार में -प्रादेशिक वृन्दावन लाल वर्मा (उपन्यास) ब्रजेश राजपूत (भोपाल) की कृति ‘द एवरेस्ट गर्ल’ एवं गीता शुक्ला गीत (रीवा) की कृति ‘चांद मायूस क्यों है’, प्रादेशिक सुभद्रा कुमारी चैहान (कहानी) सूर्यकांत नागर (इंदौर) की कृति ‘ग्यारह कहानियाँ’ एवं कला जोशी (इंदौर) की कृति ‘जागते सपने’ तथा प्रादेशिक श्रीकृष्ण सरल (कविता) राजेंद्र कोचला अम्बर (इंदौर) की कृति ‘इस देश के लिए’ एवं गोकुल प्रसाद सोनी (भोपाल) की कृति ‘सीता-स्वयंवर’, प्रादेशिक आचार्य नंददुलारे वाजपेयी (आलोचना) रमण रावल (इंदौर) की कृति ‘युग पुरुष मोदी’ एवं डाॅ. सांत्वना श्रीकांत (भोपाल) की कृति ‘भारतीय नारी स्थिति और गति’ को
को चुना गया गया है।
   इसी तरह प्रादेशिक हरिकृष्ण प्रेमी (नाटक) विजय ‘बेशर्म’(गाड़रवाड़ा) की कृति ‘जिंदगी ही नाटक है’ एवं विवेक रंजन श्रीवास्तव (भोपाल) की कृति ‘जलनाद’, प्रादेशिक राजेन्द्र अनुरागी (डायरी) डाॅ. अभय अरविन्द बेडेकर (अलीराजपुर) की कृति ‘कोरोना योद्धा की संघर्ष कथा’, प्रादेशिक पं. बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ (प्रदेश के लेखक की पहली कृति) जवाहर कर्णावत (भोपाल) की कृति ‘विदेश में हिंदी पत्रकारिता’ एवं डाॅ. राकेश सिंघई (इंदौर) की कृति ‘वक्रोक्ति’, प्रादेशिक ईसुरी (लोकभाषा विषयक) अर्चना मण्डलोई (इंदौर) की कृति ‘गेरी-गेरी छाँव’ एवं सौरभ लाड़ (इंदौर) की कृति ‘गरीब मनुस का उल्टा पांय’, और प्रादेशिक हरिकृष्ण देवसरे (बाल साहित्य) राजा चौरसिया (कटनी) की कृति ‘बचपन है फुलवारी’ एवं नीना सिंह सोलंकी (भोपाल) की कृति ‘मुनिया की खुशी’ को चुना गया है। प्रादेशिक नरेश मेहता (संवाद, पटकथा लेखन) डाॅ. मीनाक्षी दुबे (भोपाल) की कृति ‘कथा कल्पतरु’, प्रादेशिक जैनेन्द्र कुमार ‘जैन’ (लघुकथा) वृन्दावन राय सरल (सागर) की कृति ‘गजलों का गुलशन’ एवं हरिवल्लभ शर्मा ‘हरि’(भोपाल) की कृति ‘ये अँधेरों की पैरवी वाले’ को दिया गया है।