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लोक क्रांति का अग्रदूत

सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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लोक क्रांति का दूत अग्र है, श्रमिक है जिसका नाम,
मेहनत करता सारे दिन वह नहीं करे आराम
मूढ़, अशिक्षित और उपेक्षित कहते उसको लोग,
भूख-प्यास से पीड़ित वह तो क्या जाने सुख भोग।

आग उगलता तपता सूरज गरम हवा का ज़ोर,
कर्मक्षेत्र में व्यस्त नहीं है किसी से वह कमजोर
चाहे ओला, पाला हो या झमझम बरसे नीर,
नहीं कोई अवकाश उसे, कोई जाने न उसकी पीर।

दैनिक उसकी मज़दूरी है रोज कमाना-खाना,
हुआ काम का नागा यदि तो भूखा ही सो जाना
बना इमारत ऊँची-ऊँची समृद्धों को देता,
अपने घर-आँगन की चिंता कभी नहीं वह करता।

जागो श्रमिक बनो तुम यंत्री श्रम पटुता से जीवित,
लोक क्रांति का अग्रदूत बन करो धरा तुम शासित,
सदा हौसला बना के रखना जीत तुम्हारी निश्चित,
काम तुम्हारा बड़ा अनोखा कर सके अन्य नहीं कश्चित॥