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अद्भुत गूलर का फूल

पद्मा अग्रवाल
बैंगलोर (कर्नाटक)
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नीम, पीपल और बरगद की त्रिवेणी की बात तो सबने ही सुनी होगी। इन पूजनीय वृक्षों की श्रंखला में एक और दैवीय वृक्ष है- गूलर (सिकामोर)। यह नवग्रहों के वृक्षों में एक प्रमुख वृक्ष है। दर्शन दुर्लभ होने के अर्थ में ‘गूलर का फूल होना’ मुहावरे को बचपन से प्रयोग करते रहे हैं।

  गूलर के फूल के बारे में कहा जाता है, कि आज तक पृथ्वी पर इसके फूल को किसी ने नहीं देखा। इसके रहस्यमयी होने के कारण मन में जिज्ञासा हुई। ऐसा कहा जाता है, कि गूलर के फूल रात में खिलते हैं और खिलते ही यह स्वर्ग लोक में चले जाते हैं। इसके फूल कभी जमीन पर नहीं गिरते। ऐसा भी कहते हैं, कि इसके फूल कुबेर की संपदा हैं, इसलिए यह पृथ्वी वासियों के लिए उपलब्ध नहीं होते। यह भी कहा जाता है, कि पूर्णिमा की रात में खिलने वाला यह फूल बहुत भाग्यशाली लोगों को ही मिलता है। यदि किसी को मिल जाता है, तो उनकी हर इच्छा पूरी हो जाती है।
    गूलर के फूल से बने काजल में सम्मोहन शक्ति होती है। भगवान् कृष्ण इसी गूलर के काजल लगाने के कारण ही सबके मन को मोह लेते थे। ये बातें तमाम किंवदंतियों और लोककथाओं में कही गईं हैं।
गूलर के फूल की दुर्लभता और चमत्कारों के किस्से संस्कृत साहित्य और लोककथाओं में भी भरे पड़े हैं।
   इन तमाम मिथकों से थक-हार कर जब विज्ञान की शरण में पहुंची तो मालूम हुआ कि गूलर के फूल होते तो अवश्य हैं, परंतु वह अन्य पारंपरिक फूलों की तरह बाहर से नहीं दिखते। इसके फूल, फलों के अंदर ही होते हैं। अंजीर की तरह गोल-गोल गूलर के फल टहनियों पर गाँठ की तरह गुच्छों में लगते हैं। गूलर कच्चे रहने पर इसकी चटनी और सब्जी बनाई जाती है, तो पक जाने के बाद मीठे फल की तरह खाया जाता है।
   गूलर का पका हुआ फल एक तरह का पुष्प क्रम है, जिसके अंदर हजारों की संख्या में बहुत छोटे-छोटे फूल लगे होते हैं। इन पके हुए फलों के अंदर कीड़े बहुत होते हैं। फल खाने से पहले बहुत ध्यान से सारे कीड़ों को निकालना पड़ता है। फलों के अंदर ही फूल हैं, जानने के बाद फिर से पके फलों को अच्छी तरह से देखने का प्रयास किया, तो अंदर छोटे-छोटे फूलों की टेढ़ी-मेढ़ी श्रंखला और उसमें मौजूद कीड़ों को देख बहुत निराशा हुई। क्या यही वह गूलर के फूल हैं, जिनके लिए इतनी  चमत्कारिक बातें कही गईं हैं, जिनकी अलौकिक शक्तियों और दुर्लभता कॆ किस्से बखाने गए हैं।
 धन्यवाद है विज्ञान का, जिसने इस भ्रम को भी चकनाचूर करके मेरी बचपन की जिज्ञासा को शांत किया। वैसे, बचपन की कल्पनाओं वाला गूलर का फूल अत्यंत सुंदर, मनमोहक और खूबसूरत था। इसको देख कर मन अजीब-सा हो उठा।