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आओ,मिलकर `पृथ्वी दिवस` को सार्थक बनाएं

प्रभावती श.शाखापुरे
दांडेली(कर्नाटक)
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विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष………

सुन मनुज धरा की पुकार,
नित सहती है वेदना हजार।
आज सुनाऊँ व्यथा निराली,
छीनी मुझसे मेरी हरियालीll

आज वर्तमान समय में धरा की यह पुकार न जाने कितनों को सुनाई दे रही है। धरा,मनुष्य को रोज पुकार कर कहती है,-“हे मनुज,तू खुद अपना भविष्य खतरे में डाल रहा है,” पर मनुष्य है कि अपनी मौज-मस्ती में मगन है।
दुनियाभर में अनेक दिवस मनाने का पर्व चल रहा है। वैसे तो हर दिवस मनाने का अपना अलग उद्देश्य है,पर इन सभी दिवस में सबसे महत्वपूर्ण दिवस है पृथ्वी दिवस। इसे धरा दिवस या अर्थ डे भी कहा जाता है। अब प्रश्न यह उठता है कि यह दिवस हम क्यों मनाते हैं ? कब इसकी शुरुआत हुई ? इसके पीछे क्या उद्देश्य है ?
१९६९ में कैलिफोर्निया के सांता बारबरा में बड़े पैमाने पर तेल गिरने से जहरीला धुआँ,जंगल की हानि,पर्यावरण प्रदूषण और वन्य जीवों का विनाश हुआ। इस पर गायलोर्ड नेल्सन जी ने विचार किया और पर्यावरण संरक्षण की जागृति के लिए उन्होंने अनेक समुदाय,नवयुवक और मीडिया,नेताओं को एकत्रित किया। इस बात को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने ८५ राष्ट्रीय कर्मचारियों की परीक्षा ली,उसका परिणाम २२ अप्रैल को घोषित करते हुए उन कर्मचारियों का पर्यावरण संरक्षण के लिए चुनाव किया गया। नेल्सन ने इसको पर्यावरण शिक्षा कहा,पर राष्ट्रीय समन्वय डेनिस हेज ने २२ अप्रैल १९७० को इस दिवस को पृथ्वी दिवस घोषित किया। संयोगवश २२ अप्रैल नेल्सन का जन्मदिवस भी था।
पृथ्वी दिवस के दिन लोग पेड़-पौधे लगाते हैं। अपने आसपास के पर्यावरण की सफाई करते हुए इस कार्यक्रम में भाग लेते हैं। आज यह दिवस पूरे विश्व में बड़े स्तर पर मनाया जा रहा है। इस दिवस का महत्व पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मानवता संरक्षण का भी है। यह हमारे जीवन स्तर में सुधार के लिए हमें प्रेरित करता है। यह ग्लोबल वार्मिंग के विचार पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।
पृथ्वी दिवस के दिन पृथ्वी दिवस गीत गाया जाता है। भारतीय कवि अभय कुमार ने प्रेरित करने वाले इस गीत की रचना की,जो अनेक भाषाओं में गाया जाता है। इन भाषाओं में हमारी हिंदी भाषा भी शामिल है। वैसे तो पृथ्वी दिवस मनाने की शुरुआत अमेरिका में हुई,पर आज पृथ्वी को संरक्षण प्रदान करने के लिए दुनियाभर के लोग इस कार्यक्रम का सहयोग और समर्थन कर रहे हैं।
हर साल पृथ्वी दिवस मनाने के लिए अलग-अलग विषय वस्तु पर ध्यान दिया जाता है। जैसे-२००७ में संसाधनों का बचाव,२००८ में पेड़ लगाएं,धरती बचाएं,२००९ में पृथ्वी को सुरक्षित करना,२०१० में अधीन करना,२०११ का हवा को स्वच्छ रखें,२०१२ का पृथ्वी को जुटाना अर्थात सभी देश मिलकर पृथ्वी को बचाने प्रयास करें,२०१३ का जलवायु का परिवर्तन,२०१४ का ‘ग्रीन सिटी’,२०१५ का साफ पृथ्वी और हरियाली से भरी पृथ्वी, २०१६ में धरती को बचाने हेतु पेड़ लगाओ,२०१७ में पर्यावरण और जलवायु साक्षरता,२०१८ में प्लास्टिक को खत्म करना और २०१९ में वन्य जीव-जंतुओं का बचाव है।
पृथ्वी को बचाने के लिए जहाँ सरकार और अन्य संस्थाओं द्वारा अनेक कार्यक्रम और विषय वस्तुओं का आयोजन किया जा रहा है,वहीं दूसरी ओर हममें से अनेक लोग अपने स्वार्थ के लिए पृथ्वी पर स्थित प्राकृतिक सौंदर्य और शिल्पकला,वास्तुकला का विनाश करते हैं,जिसका परिणाम खुद हमें ही भुगतना पड़ रहा है। अगर इसका कोई उदाहरण देना हो तो डकबिल रॉक फॉरमेशन,नॉर्थ वेस्ट में स्थित पत्थर के रूप में बनी एक बतख (डक) है,जिसे प्राकृतिक रूप से बनने के लिए हजारों साल लगे। २०१५ में कुछ प्रवासी बच्चों ने अपनी मौज मस्ती के लिए यह खूबसूरत डक बिल तोड दिया। इतना ही नहीं, द ट्री ऑफ़ टेनेर एक अजूबा पेड़ जो सहारा रेगिस्तान में इकलौता पेड़ था,पर एक कार चालक ने शराब पीकर टक्कर मार दी और वह हरा-भरा पेड़ टूट गया। उस आदमी से जुर्माना लिया गया पर वह कुदरती पेड़ जो २५० साल से रेगिस्तान में हरा-भरा था,वह तो टूट गया न! न जाने पूरे विश्व में ऐसे कितने प्राकृतिक सौंदर्यों को मनुष्य ने अपने स्वार्थ के लिए नाश कर दिया,जिसे हम करोड़ों देकर भी देख नहीं सकते।
सिर्फ २२ अप्रैल को पृथ्वी दिवस पर पेड़-पौधों को लगाना और सफाई करना हमारा उद्देश्य न होते हुए इसे हमें अपनी दिनचर्या में ढाल लेना चाहिए,ताकि जो पेड़ हम लगाते हैं,उसकी देखभाल करके बड़ा किया जा सके।
बहुत बार ऐसा देखने को मिलता है कि पृथ्वी दिवस पर कोई नेता या वरिष्ठ व्यक्ति पेड़-पौधे लगाकर जाते हैं,उसकी देखभाल नहीं होती और वह पौधा मर जाता है। अगले पृथ्वी दिवस पर फिर कोई और नेता या वरिष्ठ व्यक्ति उसी जगह पौधा लगता है। ऐसा नहीं होना चाहिए,जो पौधा लगाता है,उसकी देखभाल भी होनी चाहिए,वरना पृथ्वी दिवस मनाने का कोई मतलब ही नहीं बच जाता है।
सही मायनों में अगर हमें पृथ्वी दिवस मनाना है तो दिल से हम सबकी एकता और सहयोग की आवश्यकता है। आने वाली पीढ़ी को अगर हम उज्ज्वल भविष्य,स्वच्छ और सुदृढ़ पर्यावरण देना चाहते हैं तो आज पृथ्वी को बचाना बहुत जरूरी है। वरना आने वाले दिनों में न पीने को पानी मिलेगा,साँस लेने के लिए ऑक्सीजन भी खरीदनी पड़ेगी, भुखमरी और महामारी चारों ओर फैल जाएगी। बढ़ते वातावरण के तापमान से पृथ्वी का बहुत-सा भाग आज जलमग्न हो रहा है।
आओ हम सब मिलकर पेड़ लगाएं,पेड़ बचाएं और पृथ्वी दिवस को सार्थक बनाएं।

परिचय-प्रभावति श.शाखापुरे की जन्म तारीख २१ जनवरी एवं जन्म स्थान-विजापुर है। वर्तमान तथा स्थाई पता दांडेली, (कर्नाटक)ही है। आपने एम.ए.,बी.एड.,एम.फिल. और पी.एच-डी. की शिक्षा प्राप्त की है। कार्य क्षेत्र-प्रौढ़ शाला में हिंदी भाषा की शिक्षिका का है। इनकी लेखन विधा-तुकांत, अतुकांत,हाईकु,कहानी,वर्ण पिरामिड, लघुकथा,संस्मरण और गीत आदि है। आपकी विशेष उपलब्धि-श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान मिलना है। श्रीमती शाखापुरे की लेखनी का उद्देश्य-कलम की ताकत से समाज में प्रगति लाने की कोशिश,मन की भावनाओं को व्यक्त करना,एवं समस्याओं को बिंबित कर हटाने की कोशिश करना है।