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आजादी का अमृत महोत्सव यूँ मनाएँ

डॉ. एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य’
मुम्बई(महाराष्ट्र)
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आजादी का अमृत महोत्सव यूँ मनाएँ,
भारत है युगों-युगों से अपने देश का नाम
‘भारत’ को ‘इंडिया’ से आज़ादी दिलवाएँ,
उन्नत देश स्वभाषा में पढ़ते व करते काम
निज भाषाओं को अंग्रेजी से मुक्त कराएँ।

गुलामी भौतिक ही नहीं मानसिक होती,
गुलामी की मानसिकता से आजादी पाएँ
राष्ट्र केवल भूमि का टुकड़ा नहीं होता,
राष्ट्र, ज्ञान-विज्ञान, धर्म संस्कृति से होता
सब मिल, अपना धर्म-संस्कृति बचाएँ।

ज्ञान, धर्म-संस्कृति की वाहक है स्वभाषा,
आओ गर्व से हम अपनी भाषाएँ अपनाएँ
हर मन में, धधके राष्ट्र प्रेम की ज्वाला।
भाषा-संस्कृति से जगें देश-प्रेम भावनाएँ,
ऐसे, आजादी का अमृत महोत्सव मनाएँ॥