राधा गोयल
नई दिल्ली
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ये उड़नछल्लो बनकर कहाँ चल दी ?
कुछ अता-पता बता कर जाएगी ?
पूछूँगी तो कहोगी-
क्या अता-पता बताऊँ ?
तुम्हारा जमाना गया,
अब हमारा जमाना है
हम लड़कियाँ क्या किसी से कम हैं ?
हाँ, हाँ, मानते हैं,
तुम लड़कियाँ किसी से कम नहीं हो
अब तो तुम लड़कों के भी कान कतरने लगी हो
किसी से कम नहीं…
तो इसका यह मतलब भी नहीं,
कि मनमर्जी से मटरगश्ती करती रहो
बिना अता-पता बताए,
घर से गायब हो जाओ।
जब तुम्हारे पापा,
बिना बताए जाते हैं
तो तुम्हें बड़ा गुस्सा आता है,
क्या यही बात
तुम पर लागू नहीं होती ?
जमाना वैसे ही खराब है,
हर वक्त दिल डरता रहता है
ऊपर से तुम्हारी यह बेढंगी पोशाक,
आधुनिकता की चकाचौंध में
इतने भी पागल मत बनो।
तुम बच्चे ही कहते हो ना,
कि बराबरी का जमाना है
हाँ बराबरी का जमाना है…,
तो… लड़कों की तरह पूरे कपड़े पहनो ना
ये इतनी छोटी निक्कर,
जाँघ भी पूरी नहीं ढक रही
क्या किसी लड़के को
इतनी छोटी निक्कर में कभी देखा है ?
बराबरी का मतलब यह तो नहीं
कि…
संस्कारों को ताक पर रख दो।
बिना अता-पता बताए,
उड़नछल्लो-सी घूमती रहो॥