राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’
धनबाद (झारखण्ड)
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मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)…
वह जो रात-दिन करता संघर्ष,
निडर नि:स्वार्थ भाव लिए सहर्ष
करता नहीं शिकायत किसी से,
जीवन में संघर्ष, केवल मौन संघर्ष।
सुनो सभी उनके जीवन की जाला,
कड़ी मेहनत से यह जुटाता निवाला
परिश्रम से वह कभी न पीछे हटते,
भले उनके हाथों में पड़ जाता छाला।
नहाता सदैव दिन-रात पसीने से,
घबराता नहीं अभाव में जीने से
वही यहाँ अन्न उगाता, महल बनाता,
स्वयं खाली पेट खुले गगन में सोता।
पंचवर्षीय नेता आते अनेक,
प्रगति का वादा करता हरेक
पर घर-आँगन न हुआ रोशन,
बच्चों को भी न मिला पोषण।
पूछता राजू’ समाज से आज,
मजदूर सहता रहेगा कब तक ?
कब होगा इनके दुखों का अंत,
मिलेगा इन्हें अपना मान कब ??
परिचय-साहित्यिक नाम `राजूराज झारखण्डी` से पहचाने जाने वाले राजू महतो का निवास झारखण्ड राज्य के जिला धनबाद स्थित गाँव-लोहापिटटी में है। जन्म तारीख १० मई १९७६ और जन्म स्थान धनबाद है। भाषा ज्ञान-हिन्दी का रखने वाले श्री महतो ने स्नातक सहित एलीमेंट्री एजुकेशन (डिप्लोमा) की शिक्षा प्राप्त की है। साहित्य अलंकार की उपाधि भी हासिल है। आपका कार्यक्षेत्र-नौकरी (विद्यालय में शिक्षक) है। सामाजिक गतिविधि में आप सामान्य जनकल्याण के कार्य करते हैं। लेखन विधा-कविता एवं लेख है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक बुराइयों को दूर करने के साथ-साथ देशभक्ति भावना को विकसित करना है। पसंदीदा हिन्दी लेखक-प्रेमचन्द जी हैं। विशेषज्ञता-पढ़ाना एवं कविता लिखना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-“हिंदी हमारे देश का एक अभिन्न अंग है। यह राष्ट्रभाषा के साथ-साथ हमारे देश में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। इसका विकास हमारे देश की एकता और अखंडता के लिए अति आवश्यक है।