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उत्तराखंड की आवाज है ‘पहाड़ी गूंज’

आरती सिंह ‘प्रियदर्शिनी’
गोरखपुर(उत्तरप्रदेश)
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वर्तमान अंकुर के तत्वाधान में प्रकाशित साझा काव्य संग्रह पहाड़ी गूंज में हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड के रचनाकारों ने अपना अप्रतिम योगदान दिया है। साझा संग्रह तथा क्षेत्रीय साझा संग्रह की श्रृंखला में यह पुस्तक अपना एक अलग स्थान रखती है। पुस्तक का संपादन निर्मेश त्यागी ने किया है तथा १४ रचनाकारों ने इसमें साहित्यिक योगदान दिया है।
सर्वप्रथम मनोज शाह की ग़ज़लें हैं,जो पाठकों का मन मोह लेती हैl उन्होंने अपनी ग़ज़ल फर्क इतना में सामाजिक असमानता का मुद्दा उठाया है जो अत्यंत मार्मिक है।
“तू रोया मिट्टी में दबी मजारों से…
मैं रोया राखनुमा शमशानों से…”
मणि अग्रवाल एक गृहिणी है,फिर भी उनकी रचनाओं में परिपक्वता है। उनकी कविता गृह स्वामिनी तथा मेरा उत्तराखंड के शब्द भाव विभोर कर देते हैं। उत्तराखंड के पहाड़ी सौंदर्य को उन्होंने इस प्रकार शब्दों में पिरोया है कि पहाड़ जीवित हो उठे हैं।
सुनीता सोनू की कविताओं में प्रेम का भाव सर्वोपरि है। छोटी-छोटी कविताओं के माध्यम से उन्होंने प्रेम का जो भाव व्यक्त किया है वह काबिले तारीफ है। मुक़द्दर,तुमसे कुछ कहना है,यादों के लम्हें बहुत ही खूबसूरत है।
“टूट जाते हैं कुछ बिखर जाते हैं,मुक़द्दर जिंदगी के यूँ ही रूठ जाते हैं।”
रामभगत नेगी ने अपनी कविताओं में समाज के हर तबके को काव्य रस से भिगोया है। होली मैं मनाऊं कैसे में सैनिक परिवार की मनोदशा, बोरिंग-बोरिंग में बच्चों की मनोदशा,मैं किसान हूँ में किसानों की स्थिति तथा रिश्वत को करीब से देखा है में भ्रष्टाचार पर अपनी बेबाक कलम चलाई है।
कुसुम पंत उत्साही की रचनाओं में भक्ति भाव प्रबल हैl उनकी भक्ति ना सिर्फ भगवान के प्रति,बल्कि समाज,उत्तराखंड और स्त्री-पुरुष के प्रति भी झलकती है। उनकी हाईकू विधा में रचित पुस्तक के भाव अत्यंत सुंदर है।
ज्ञान पुस्तक
मोबाइल दस्तक
घूमा मस्तकl

इतने कम शब्दों में ही उन्होंने बहुत कुछ कह दिया है।
भारती शर्मा बौड़ाई ने अपनी रचनाओं में प्रकृति,रिश्ते एवं समाज की समस्याओं को स्थान दिया है। गलतफहमियां,इंसान बने,गौरैया तथा परछाई कविता में भी प्रकृति एवं मनुष्य के रिश्तों पर भरपूर दृष्टि डाली है।
प्रमोद कुमार हर्ष ने अपनी कविताओं में देश भक्ति तथा मातृत्व भाव को गंभीरता से व्यक्त किया है।
“कहां है माँ भरोसा तुम्हारा,माथा मेरा चूम लो एक बार
आँचल फैला कर सुला दो एक बार…”


लेखिका ऋतु थपलियाल सुदेवस्तु की कविताएं मानव को प्रकृति एवं पहाड़ों से जोड़ती है। “ओ मौन शैल शिखर पर रहने वाले”, भष्मीकरण, मनुष्यता की चीत्कार इत्यादि कविताओं में उनका शब्द सौष्ठव पठनीय हैl
“स्वार्थ की भाषा जिह्वा पर विराजित है
धर्म युद्ध के परिणाम में स्वयं ही पराजित हैl”
देहरादून की उषा झा की कविताओं में बेबसी तथा नारी ममता की छांव में उनके शब्द जीवंत हो उठते हैं। परम्परा तथा तर्पण कविता में उन्होंने नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति के रस में डूबोने का कार्य किया है जो अप्रतिम है।
नंदकिशोर परिमल ने क्षेत्रीय भाषाओं में अपनी कलम चलाई है। उन्होंने अपनी रचनाओं में लोक परम्परा को कायम रखते हुए सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार किया है।
विजय शाह दीक्षित द्वारा रचित गीत हृदयस्पर्शी है। विद्यालय गीत, हिमालय दर्शन गीत,पढ़ो बढ़ो इत्यादि कविताएं ज्ञानवर्धक होने के साथ-साथ अत्यंत रोचक भी है।
डॉ.कुलभूषणसिंह व्यास ने शारदा स्तूति में माँ शारदे का जीवंत चित्रण किया है। बढ़ती हुई भीड़,हार जीत तथा सपने कविता में उन्होंने सामाजिक जीवन का चित्र प्रस्तुत किया है।
वरिष्ठ लेखिका सीमा गर्ग मंजरी अपनी रचनाओं में अपने आसपास के माहौल को खूबसूरती से शब्दों में उतार देती हैं। मजबूर,बचपन,आम का पेड़ इत्यादि कविताएं इसका उदाहरण है।
वरिष्ठ लेखक पूरण भंडारी की रचनाएं अधिकतर जीवन अनुभव एवं सामाजिक विषयों पर आधारित होते हैं। नोटबंदी की बरसी,जख्म,अत्याचार,कोख इत्यादि कविताओं में उनके अनुभव एवं भावनाएं स्पष्ट परिलक्षित होती हैं।
अंततः हम कह सकते हैं कि,इस पुस्तक के पाठक अपने हृदय में पहाड़ी गूँज को अवश्य महसूस कर सकेंगे।

परिचय-आरती सिंह का साहित्यिक उपनाम-प्रियदर्शिनी हैl १५ फरवरी १९८१ को मुजफ्फरपुर में जन्मीं हैंl वर्तमान में गोरखपुर(उ.प्र.) में निवास है,तथा स्थाई पता भी यही हैl  आपको हिन्दी भाषा का ज्ञान हैl इनकी पूर्ण शिक्षा-स्नातकोत्तर(हिंदी) एवं रचनात्मक लेखन में डिप्लोमा हैl कार्यक्षेत्र-गृहिणी का हैl आरती सिंह की लेखन विधा-कहानी एवं निबंध हैl विविध प्रादेशिक-राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में इनकी कलम को स्थान मिला हैl प्रियदर्शिनी को `आनलाईन कविजयी सम्मेलन` में पुरस्कार प्राप्त हुआ है तो कहानी प्रतियोगिता में कहानी `सुनहरे पल` तथा `अपनी सौतन` के लिए सांत्वना पुरस्कार सहित `फैन आफ द मंथ`,`कथा गौरव` तथा `काव्य रश्मि` का सम्मान भी पाया है। आप ब्लॉग पर भी अपनी भावना प्रदर्शित करती हैंl इनकी लेखनी का उद्देश्य-आत्मिक संतुष्टि एवं अपनी रचनाओं के माध्यम से महिलाओं का हौंसला बढ़ाना हैl आपके लिए पसंदीदा हिन्दी लेखक-प्रेमचंद एवं महादेवी वर्मा हैंl