कुल पृष्ठ दर्शन : 269

You are currently viewing करना मत भेद

करना मत भेद

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला(मध्यप्रदेश)
*******************************************

करना मत तुम भेद अब, बेटा-बेटी एक।
बेटी प्रति यदि हेयता, वह बंदा नहिं नेक॥
वह बंदा नहिं नेक, करे दुर्गुण को पोषित।
बेटी हो मायूस, व्यर्थ ही होती शोषित॥
दूषित हो संसार, पड़ेगा हमको भरना।
संतानों में भेद, बुरा होता है करना॥

बेटा कुल का नूर है, तो बेटी है लाज।
बेटा है संगीत तो, बेटी लगती साज़॥
बेटी लगती साज, बढ़ाती दो कुल आगे।
उससे डरकर दूर, सदा अँधियारा भागे॥
जहाँ पल रहा भेद, वहाँ तो मौसम हेटा।
नहिं किंचित उत्थान, जहाँ बस भाता बेटा॥

गाओ प्रियवर गीत तुम, समरसता के आज।
सुता और सुत एक हैं, जाने सकल समाज॥
जाने सकल समाज, बराबर दोनों मानो।
बेटी कभी न बोझ, बात यह चोखी जानो॥
संतानों से नेह, बराबर उर में लाओ।
फिर सब कुछ जयकार, अमन के नग़मे गाओ॥

परिचय–प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे का वर्तमान बसेरा मंडला(मप्र) में है,जबकि स्थायी निवास ज़िला-अशोक नगर में हैL आपका जन्म १९६१ में २५ सितम्बर को ग्राम प्राणपुर(चन्देरी,ज़िला-अशोक नगर, मप्र)में हुआ हैL एम.ए.(इतिहास,प्रावीण्यताधारी), एल-एल.बी सहित पी-एच.डी.(इतिहास)तक शिक्षित डॉ. खरे शासकीय सेवा (प्राध्यापक व विभागाध्यक्ष)में हैंL करीब चार दशकों में देश के पांच सौ से अधिक प्रकाशनों व विशेषांकों में दस हज़ार से अधिक रचनाएं प्रकाशित हुई हैंL गद्य-पद्य में कुल १७ कृतियां आपके खाते में हैंL साहित्यिक गतिविधि देखें तो आपकी रचनाओं का रेडियो(३८ बार), भोपाल दूरदर्शन (६ बार)सहित कई टी.वी. चैनल से प्रसारण हुआ है। ९ कृतियों व ८ पत्रिकाओं(विशेषांकों)का सम्पादन कर चुके डॉ. खरे सुपरिचित मंचीय हास्य-व्यंग्य  कवि तथा संयोजक,संचालक के साथ ही शोध निदेशक,विषय विशेषज्ञ और कई महाविद्यालयों में अध्ययन मंडल के सदस्य रहे हैं। आप एम.ए. की पुस्तकों के लेखक के साथ ही १२५ से अधिक कृतियों में प्राक्कथन -भूमिका का लेखन तथा २५० से अधिक कृतियों की समीक्षा का लेखन कर चुके हैंL  राष्ट्रीय शोध संगोष्ठियों में १५० से अधिक शोध पत्रों की प्रस्तुति एवं सम्मेलनों-समारोहों में ३०० से ज्यादा व्याख्यान आदि भी आपके नाम है। सम्मान-अलंकरण-प्रशस्ति पत्र के निमित्त लगभग सभी राज्यों में ६०० से अधिक सारस्वत सम्मान-अवार्ड-अभिनंदन आपकी उपलब्धि है,जिसमें प्रमुख म.प्र. साहित्य अकादमी का अखिल भारतीय माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार(निबंध-५१० ००)है।