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कुछ दोस्त हैं मेरे

डॉ. श्राबनी चक्रवर्ती
बिलासपुर (छतीसगढ़)
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कुछ दोस्त हैं मेरे-
अच्छे, सच्चे, कच्चे, गच्चे और बिचके,
पांच उंगलियों की तरह अलग-अलग
अजब-गजब, तुनक-मिजाज, प्यारे-न्यारे,
लगभग हर प्रकार के ये अजीज दुलारे।

कुछ दोस्त हैं मेरे-
उनके मन में कविता है,
प्रेम की सविता है
जीवन का अद्भुत झरोखा है,
दोस्ती में सुकून बेहद भरोसा है।

कुछ दोस्त हैं मेरे-
उनके सुख और दु:ख अपने हैं
हसीन पलों में रंगीन सपने हैं,
कुछ पल हॅंसाए, कुछ पल साथ रुलाए
मुसीबतों में एक साथ हाथ बढ़ाए।

कुछ दोस्त हैं मेरे-
उनकी बातें सुन कर कान पक जाए,
ठहाकों से लोट-पोट हो पेट फट जाए
पास रहे तो दिल खिल जाए
दूर चले जाए तो जी मुरझाए।

कुछ दोस्त हैं मेरे-
खट्टे-मीठे बेर के जैसे,
स्वाद भर दे बेरंग दिनों में।
शांत, चटक, मटक, नखरीले,
फरिश्तों के रुप में ये अनमोल मोती मिले॥

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