सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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कैसी है विडम्बना ?
स्त्रीत्व की यह अवहेलना,
निर्णय स्वयं वह कर नहीं पाती
क्योंकि समाज की है वर्जना।
अविवाहिता की कामना
अति उद्विग्न नहीं मानना,
समाज में हो जाएगा मुश्किल
उस छोटी-सी जान का जीना।
कलेजे का टुकड़ा
किसी के द्वारा जाएगा पकड़ा,
मिलेगी सम्मान की ज़िंदगी
असहाय न रह जाएगा खड़ा।
निर्णय यही लेना,
इसको नदी में बहा देना।
ईश्वर ही बनेगा इसका सहारा,
लाल को आख़िरी बार निहार लेना॥