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खट्टे-मीठे अनुभव

रीता अरोड़ा ‘जय हिन्द हाथरसी’
दिल्ली(भारत)
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‘हम सब साथ-साथ हैं’ का दसवां अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा प्रदर्शन सम्मान समारोह इस बार हिंदुस्तानी भाषा अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में भूटान में होना सुनिश्चित (१६ से २३) हुआ। इससे पहले मुझे साथ-साथ के ‘भारत-नेपाल मैत्री सम्मेलन’ में प्रतिभागी होने का अवसर मिला था।

यहाँ हम चर्चा करेंगे भूटान भ्रमण की, जिसकी राजधानी थिम्फू है, जो भूटान का सबसे बड़ा पर्वतीय शहर है। भूटान की भाषा ज़ोंगखा है, जबकि वहाँ हिन्दी, इंग्लिश, नेपाली भाषा भी बोली व समझी जाती है। भूटान की रात का दृश्य काबिले-तारीफ है।
१४ सितम्बर को हमारी ट्रेन यात्रा भूटान के लिए न्यू दिल्ली से न्यू जलपाईगुड़ी तक थी, तथा हवाई यात्रा से आने वाले कलाकार साथी इंदिरा गांधी विमानतल दिल्ली से बागडोगरा-न्यू जलपाईगुड़ी तक भूटान यात्रा के लिए पहुंचे। विभिन्न राज्यों से आए साहित्यकार, गीतकार एवं अन्य प्रतिभाओं के धनी साथी कलाकार इस आयोजन में प्रतिभाग करने के लिए पहुंचे। दिल्ली रेलवे स्टेशन से न्यू जलपाईगुड़ी तक की ट्रेन में सभी कलाकार साथी लगभग एकसाथ ही बैठे थे। हमारे साथ ही संस्था के आयोजक डॉ. किशोर श्रीवास्तव एवं डॉ. सुधाकर पाठक ने भी सफर किया।
सभी एक-दूसरे का ख्याल इस प्रकार रख रहे थे, जैसे एक ही परिवार के सदस्य हों।‌ऐसा महसूस हो रहा था कि, हम सब साथ-साथ हैं।
हम अगले दिन १५ सितम्बर की रात्रि में न्यू जलपाईगुड़ी पहुंचे। इस २४-२५ घंटों में कविताएं-अंताक्षरी इत्यादि करते हुए सफर कब समाप्त हुआ, मालूम ही नहीं चला। जाते समय ट्रेन में ही अभिनेता डॉ. श्रीवास्तव ने एक लघु फिल्म ‘चौकसी’ बनाई, जिसमें सभी साथियों ने शानदार भूमिका निभाई।
हम जलपाईगुड़ी स्टेशन पर पहुंचकर अपने होटल में पहुंचे जिसमें हमने दिल्ली से अग्रिम में कमरे आरक्षित कर लिए थे। रात्रि विश्राम किया तथा सुबह की चाय पी। तब तक बागडोगरा जलपाईगुड़ी हवाई यात्रा से आने वाले कलाकार साथियों को लेते हुए बस हमें भी होटल से भूटान सीमा के पास जयगांव तक ले गई। लगभग ४ घंटे का सफर तय करते हुए हम सभी भूटान भ्रमण के लिए सीमा पर पहुंचे। हमें भूटान भ्रमण के लिए गाइड मिला था, जिसने हमें पहले से ही भूटान के विषय में जानकारी दी थी कि, वहाँ क्या नहीं करना चाहिए, जिससे सजा वगैरह से बचा जा सके।
भूटान सीमा पर सबने अपनी आईडी कार्ड-पासपोर्ट वगैरह हाथ में ले लिए ओर जाँच मशीन द्वारा हमारे सामान उस तरफ पहुंच गए थे। अब भूटान सीमा पर सबके चेहरे व आँख की जाँच कम्प्यूटर द्वारा की गई। फिर हमें भूटान सीमा पर उस तरफ भेजा गया, जहाँ हमने तस्वीरें लेने का आनंद लिया। फिर हमें भूटान सीमा पर नजदीकी होटल में पैदल-बस द्वारा पहुंचाया गया।
होटल पहुंचकर हम सबको कमरे मिल गए, और स्टाफ ने हमारे सामान को कमरे में रखवा दिया।
१६ सितम्बर को संस्था का पहला कार्यक्रम परिचय सत्र था। सबने २-४ पंक्ति में परिचय दिया। उसके बाद हाल में भोजन करने के लिए कहा। इससे पहले सूचना दी गई कि, सभी सुबह ८ बजे हाल में नाश्ता करने आ जाएं तथा बाद में अपने सामान कमरे से बाहर रख दें।
१७ सितम्बर के आयोजन के लिए भूटान में फ़ुएंत्शोलिंग के लिए रवाना हो गए। होटल फ़ुएंत्शोलिंग पहुंचकर सबको अपने-अपने कमरे मिल गए।फिर भोजन के बाद आशा शर्मा और डॉ. पाठक के संचालन में ‘विश्व बंधुत्व की आवश्यकता पर चर्चा’ हुई, जिसमें विभिन्न राज्यों से आए भारतीय साहित्यकारों ने हिस्सा लिया और एक से बढ़ कर एक विचार व्यक्त किए।
परिचर्चा के पश्चात डॉ. श्रीवास्तव ने घोषणा की कि, हम सबको सुबह ८ बजे नाश्ते के लिए हाल में आना है एवं भूटान भ्रमण कर आनंद लेते हुए राजधानी थिम्फू में जाना है।
१८ सितम्बर को भ्रमण करते हुए सभी साथी थिम्फू पहुंचे एवं होटल में सामान रखवा कर सबने साथ में भोजन किया। पश्चात अंजू मोटवानी एवं सुरेन्द्र सिंह राजपूत ‘हमसफर’ के सुन्दर संचालन में काव्य पाठ किया। उसके बाद वही घोषणा हुई कि, सभी साथी सुबह ८ बजे हाल में नाश्ता करने आ जाएं, हमें भूटान भ्रमण के अगले पड़ाव के लिए निकलना है।
१९ सितम्बर को सभी साथी नाश्ते के बाद भ्रमण करते हुए भूटान के ‘पारो’ शहर में पहुंचे। यहाँ होटल में सभी सम्मानित कलाकारों के लिए संस्था द्वारा अभिनय सत्र एवं अंताक्षरी सत्र कार्यक्रम आयोजित किया गया था।
भोजन के बाद होटल में भूषण अग्रवाल एवं साहित्यकार कु. चंचल के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में सबने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
२० सितम्बर को भी भूटान के होटल पारो में ही ‘भारतीय-भूटानी सांस्कृतिक कार्यक्रम (गायन, नृत्य, भाषण, योग और पुरस्कार समारोह के बाद रात्रिभोज) के साथ छोटी पार्टी (दोपहर ढाई से साढ़े ७ बजे) आयोजित की गई।
इस यात्रा में यह भी मालूम हुआ कि, भूटान में ३ पत्नियों को रखने की अनुमति सरकार द्वारा है, यदि पहली पत्नी की सहमति हो। भूटान की कुल आबादी में हिंदूओं की कुल आबादी ११.३ फीसदी है। भूटान में बौद्ध मंदिर, मठ और कुछ हिन्दू मंदिर भी हैं। १ भी मस्जिद नहीं है, लेकिन हजारों मुस्लिम रहते हैं। भूटान में सबसे अधिक बौद्ध धर्म का पालन किया जाता है और मानने वाले ७५ प्रतिशत लोग हैं।
ऐसे ही भूटान में तम्बाकू तथा प्लास्टिक की थैली पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। पर्यावरण की दृष्टि से भूटान सभी देशों में अग्रणी है। भूटान पर्यटकों पर निर्भर तथा गरीब देश होने के बावजूद भी खुशहाल देश है। भूटान के पास सेना है, लेकिन नौसेना तथा वायुसेना नहीं है इसलिए बाहरी आक्रमण से इसका भारत ख्याल रखता है।
भूटान के लोगों को पेड़ लगाना बहुत पसंद है। अपने राजा-रानी के राजकुमार ग्यालसे के जन्मदिन पर भूटान के लोगों ने १,०८,००० ० पौधे लगाए थे।
भूटान पर्वतीय देश होने के साथ ही चीन की सीमा से भी सटा हुआ है। भूटान को ‘द लैंड आफ थंडर ड्रैगन्स’ कहा जाता है तथा दूसरा नाम ‘द्रक यू’ भी है। कुल मिलाकर यह यात्रा खट्टे-मीठे अनुभव वाली और अविस्मरणीय रही।