ममता सिंह ‘विशिष्ट’
धनबाद (झारखंड)
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अमृत की रात (शरद पूर्णिमा विशेष)…
आश्विन शरद पूर्णिमा की रात में
अमृत की किरणे बरसाती है,
पूर्ण चन्द्रमा की सोलह कलाएं रात में आज मिल कर चाँदनी फैलाती हैं।
धार्मिक मान्यता हैं हमारी बरसों से,
श्री कृष्ण वृन्दावन में रास रचाते हैं
वृंदावन की गोपियाँ भी कृष्ण के संग में,
हँसी-खुशी मिल नाचती-गाती हैं।
खीर का भोग बना कर रखते रात में,
सुबह में फिर मिल-जुल संग खाते हैं
छिद्र युक्त मिट्टी पात्र में दीपक बहन जलाती,
भाई के ऊपर से बहन बुरी नजर उतारती है।
जलती हांडी में झाँक कर भाई आशीर्वाद देते,
और यही मान्यता बरसों से चली आती है
शनि के भय से नारियाँ हाड़ी दीपक में,
वनवास से लौटते राम की आरती उतारती हैं।
शरद पूर्णिमा की रात,
खुशियों की होती रात।
इस दिन गोपियाँ कान्हा के संग, खुशी से नाचती हैं॥