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गणेश वंदना

वंदना जैन
मुम्बई(महाराष्ट्र)
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विघ्नहर्ता गजानंद विशेष….

पूजा के प्रथमेश गणेशा,
ज्ञान, प्रकाश, पुंज गणेशा।

सिद्धिविनायक संकटहारी,
मन अति भाए मूषक सवारी।

एकदन्त जग पावन राजा,
निर्विध्न हो सधे सब काजा।

भक्तों के हो भाग्य विधाता,
मोदक भोग अति सुहाता।

अतुल्य तेज, छवि मनोरम,
गजकर्ण सोहे छवि अनुपम।

पुत्र रत्न जिनके शुभ-लाभ,
हो रिद्धि-सिद्धि के नाथ।

विध्न जिनके सम्मुख हारे,
वो हैं शिव-गौरी के दुलारे।

ज्ञाता हो बुद्धि के गणेशा,
विश्वास तुम्हीं हो मेरे गणेशा।

वर पिपासु हूँ मैं तुच्छ प्राणी,
स्थिर बुद्धि मधुर हो वाणी।

नाश होवे अभिमान का,
दान मिले अभिज्ञान का।

आपसे है अनुग्रह विशेष,
ज्ञान-सौभाग्य दिशा दो गणेश॥

परिचय-वंदना जैन की जन्म तारीख ३० जून और जन्म स्थान अजमेर(राजस्थान)है। वर्तमान में जिला ठाणे (मुंबई,महाराष्ट्र)में स्थाई बसेरा है। हिंदी,अंग्रेजी,मराठी तथा राजस्थानी भाषा का भी ज्ञान रखने वाली वंदना जैन की शिक्षा द्वि एम.ए. (राजनीति विज्ञान और लोक प्रशासन)है। कार्यक्षेत्र में शिक्षक होकर सामाजिक गतिविधि बतौर सामाजिक मीडिया पर सक्रिय रहती हैं। इनकी लेखन विधा-कविता,गीत व लेख है। काव्य संग्रह ‘कलम वंदन’ प्रकाशित हुआ है तो कई पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित होना जारी है। पुनीत साहित्य भास्कर सम्मान और पुनीत शब्द सुमन सम्मान से सम्मानित वंदना जैन ब्लॉग पर भी अपनी बात रखती हैं। इनकी उपलब्धि-संग्रह ‘कलम वंदन’ है तो लेखनी का उद्देश्य-साहित्य सेवा वआत्म संतुष्टि है। आपके पसंदीदा हिन्दी लेखक-कवि नागार्जुन व प्रेरणापुंज कुमार विश्वास हैं। इनकी विशेषज्ञता-श्रृंगार व सामाजिक विषय पर लेखन की है। जीवन लक्ष्य-साहित्य के क्षेत्र में उत्तम स्थान प्राप्त करना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-‘मुझे अपने देश और हिंदी भाषा पर अत्यधिक गर्व है।’