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गुनगुन

वीना सक्सेना
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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दादी को अपनी पोती गुनगुन से विशेष लगाव था। उनकी तीन पोतियां थी,पर सबसे प्यारी उनको गुनगुन थी। उसे अपने साथ सुलाना,नहलाना-धुलाना,कहीं जाना तो साथ में ले जाना,यहां तक कि दूसरे शहर भी जाती तो भी गुनगुन साथ होती। और यह सब करने पर दादी थक भी जाती थी,पर गुनगुन का स्नेह था। एक दिन दादी ने गुनगुन से कहा-गुनगुन अबकी बर्थडे पर मैं तुम्हें साईकिल दिलाऊंगी,लेकिन अचानक दादी बीमार पड़ गई। चार महीने लगातार अस्पताल में भर्ती रहने के बाद उनका देहांत हो गया। गुनगुन कुछ समझ ही नहीं पाई। उसने घरवालों से पूछा तो उसे बताया गया-दादी भगवान के पास चली गई।
“ओल मेरी मेरी छाईकिल”?
दादाजी दिला देंगे,गुनगुन खुश हो गई। वह रोज दादाजी से साइकिल की जिद करती। दादाजी उसे बहला देते,आजकल पर टाल देते। एक दिन गुनगुन के सब्र का बांध टूट ही गया,उसने दादा जी से कहा-“अले बाबा आप छायकल दिलाते त्यों नहीं है ? एक दिन आप भी दादी की तलहा भगवान के पाछ चले जाओगे,मेली छाईकिल फिल अतक जाएगी।”

परिचय : श्रीमती वीना सक्सेना की पहचान इंदौर से मध्यप्रदेश तक में लेखिका और समाजसेविका की है।जन्मतिथि-२३ अक्टूबर एवं जन्म स्थान-सिकंदराराऊ (उत्तरप्रदेश)है। वर्तमान में इंदौर में ही रहती हैं। आप प्रदेश के अलावा अन्य प्रान्तों में भी २० से अधिक वर्ष से समाजसेवा में सक्रिय हैं। मन के भावों को कलम से अभिव्यक्ति देने में माहिर श्रीमती सक्सेना को कैदी महिलाओं औऱ फुटपाथी बच्चों को संस्कार शिक्षा देने के लिए राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। आपने कई पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया है।आपकी रचनाएं अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुक़ी हैं। आप अच्छी साहित्यकार के साथ ही विश्वविद्यालय स्तर पर टेनिस टूर्नामेंट में चैम्पियन भी रही हैं। `कायस्थ गौरव` और `कायस्थ प्रतिभा` सम्मान से विशेष रूप से अंलकृत श्रीमती सक्सेना के कार्यक्रम आकाशवाणी एवं दूरदर्शन पर भी प्रसारित हुए हैं। कई पत्र-पत्रिकाओं में अनेक लेख प्रकाशित हो चुके हैंl आपका कार्यक्षेत्र-समाजसेवा है तथा सामजिक गतिविधि के तहत महिला समाज की कई इकाइयों में विभिन्न पदों पर कार्यरत हैंl उत्कृष्ट मंच संचालक होने के साथ ही बीएसएनएल, महिला उत्पीड़न समिति की सदस्य भी हैंl आपकी लेखन विधा खास तौर से लघुकथा हैl आपकी लेखनी का उद्देश्य-मन के भावों को अभिव्यक्ति देना हैl