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ग्रीष्म में प्यासे परिन्दे

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला(मध्यप्रदेश)

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गर्मी में प्यासे फिरें, बंधु परिन्दे आज।
कोई रखता नीर नहिं, कैसा हुआ समाज॥

नहीं सकोरे अब रखें, छत, आँगन में सून।
खग को मारे ग्रीष्म नित, काल बने मई-जून॥

भटकें व्याकुल आज खग, दूर-दूर नहिं नीर।
देखो बढ़ती जा रही, मासूमों की पीर॥

ग्रीष्म सताता जीव को, हर लेता है प्राण।
नीर बिना जीवन मिटे, मारे आतप बाण॥

गर्मी का मौसम कहे, जीवों को दो नीर।
वरना उनको नीर बिन, आतप देगा चीर॥

मिटते हैं जलस्रोत नित, रोता देखो नीर।
बंधु आजकल पेयजल, बदल चुका तासीर॥

करुणा इंसां में नहीं, वह अब नहीं उदार।
खग तरसें हैं नीर को, करती गर्मी वार॥

ग्रीष्म काल,है मातमी, खग सारे बेचैन।
खोज रहे हैं नीर को, उनके आकुल नैन॥

जान हलक में है फँसी, बढ़ती जाती प्यास।
ग्रीष्म बना आतंक है, पक्षी तजते आस॥

ग्रीष्म,प्यास,खग,नीर ये, कहते सुन इंसान।
जल थोड़ा दे और को, मत बन तू हैवान॥

परिचय–प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे का वर्तमान बसेरा मंडला(मप्र) में है,जबकि स्थायी निवास ज़िला-अशोक नगर में हैL आपका जन्म १९६१ में २५ सितम्बर को ग्राम प्राणपुर(चन्देरी,ज़िला-अशोक नगर, मप्र)में हुआ हैL एम.ए.(इतिहास,प्रावीण्यताधारी), एल-एल.बी सहित पी-एच.डी.(इतिहास)तक शिक्षित डॉ. खरे शासकीय सेवा (प्राध्यापक व विभागाध्यक्ष)में हैंL करीब चार दशकों में देश के पांच सौ से अधिक प्रकाशनों व विशेषांकों में दस हज़ार से अधिक रचनाएं प्रकाशित हुई हैंL गद्य-पद्य में कुल १७ कृतियां आपके खाते में हैंL साहित्यिक गतिविधि देखें तो आपकी रचनाओं का रेडियो(३८ बार), भोपाल दूरदर्शन (६ बार)सहित कई टी.वी. चैनल से प्रसारण हुआ है। ९ कृतियों व ८ पत्रिकाओं(विशेषांकों)का सम्पादन कर चुके डॉ. खरे सुपरिचित मंचीय हास्य-व्यंग्य  कवि तथा संयोजक,संचालक के साथ ही शोध निदेशक,विषय विशेषज्ञ और कई महाविद्यालयों में अध्ययन मंडल के सदस्य रहे हैं। आप एम.ए. की पुस्तकों के लेखक के साथ ही १२५ से अधिक कृतियों में प्राक्कथन -भूमिका का लेखन तथा २५० से अधिक कृतियों की समीक्षा का लेखन कर चुके हैंL  राष्ट्रीय शोध संगोष्ठियों में १५० से अधिक शोध पत्रों की प्रस्तुति एवं सम्मेलनों-समारोहों में ३०० से ज्यादा व्याख्यान आदि भी आपके नाम है। सम्मान-अलंकरण-प्रशस्ति पत्र के निमित्त लगभग सभी राज्यों में ६०० से अधिक सारस्वत सम्मान-अवार्ड-अभिनंदन आपकी उपलब्धि है,जिसमें प्रमुख म.प्र. साहित्य अकादमी का अखिल भारतीय माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार(निबंध-५१० ००)है।

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