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चुनाव

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’
पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड)
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देखैं किसके सिर सजे,
मोर मुकुट का पांख।
कौन चले शेरों तरह,
कौन दबाता आँख॥

लूटा है जिसने बहुत,
पाकर के सरकार।
वह नेता ही कह रहे,
हम हैं पालनहार॥

अपने-अपने राग हैं,
अपने-अपने दाँव।
वो गाँव की बात करैं,
नहिं देखा जो गाँव॥

जो महलों ने हैं जने,
पाई सोने थाल।
वो क्या जानेंगे बता,
तुझ गरीब का हाल॥

भारत में मतदान की,
बहने लगी बयार।
नित चालाकी कर रहे,
नेता चतुर सियार॥

रसना से नित हो रही,
गाली की बौछार।
ऐसे नेता हो गई,
क्या होगी सरकार॥

सच का ही होगा चयन,
मन में लें हम ठान।
चलो युवा मिलकर करें ,
हृदय से मतदान॥

भाषण से कब है मिटी,
किसी उदर की भूख।
अरे काग नेता करें,
कोयल जैसी कूक॥

मिटी गरीबी तिल नहीं,
भाषण में था जोर।
थी काली रजनी बड़ी,
बता रहे थे भोर॥

नेता दर-दर हैं फिरे,
माँग रहे हैं वोट।
फिर जनता दर-दर फिरे,
नेता लेते ओट॥

ओ जनता करना जरा,
सोच समझ मतदान।
परदेशों में बढ़ रहा,
अब भारत का मान॥

मतदान है भारत का,
एक बड़ा त्यौहार।
सभी मनाते साथ में ,
तब मिलती सरकार॥

जगता है जब-जब यहां,
वोटर जैसा शेर।
कभी नहीं फिर लग सके,
अंधन हाथ बटेर॥

परिचय-डॉ.विद्यासागर कापड़ी का सहित्यिक उपमान-सागर है। जन्म तारीख २४ अप्रैल १९६६ और जन्म स्थान-ग्राम सतगढ़ है। वर्तमान और स्थाई पता-जिला पिथौरागढ़ है। हिन्दी और अंग्रेजी भाषा का ज्ञान रखने वाले उत्तराखण्ड राज्य के वासी डॉ.कापड़ी की शिक्षा-स्नातक(पशु चिकित्सा विज्ञान)और कार्य क्षेत्र-पिथौरागढ़ (मुख्य पशु चिकित्साधिकारी)है। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत पर्वतीय क्षेत्र से पलायन करते युवाओं को पशुपालन से जोड़ना और उत्तरांचल का उत्थान करना,पर्वतीय क्षेत्र की समस्याओं के समाधान तलाशना तथा वृक्षारोपण की ओर जागरूक करना है। आपकी लेखन विधा-गीत,दोहे है। काव्य संग्रह ‘शिलादूत‘ का विमोचन हो चुका है। सागर की लेखनी का उद्देश्य-मन के भाव से स्वयं लेखनी को स्फूर्त कर शब्द उकेरना है। आपके पसंदीदा हिन्दी लेखक-सुमित्रानन्दन पंत एवं महादेवी वर्मा तो प्रेरणा पुंज-जन्मदाता माँ श्रीमती भागीरथी देवी हैं। आपकी विशेषज्ञता-गीत एवं दोहा लेखन है।