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जन्मदात्री

उमेशचन्द यादव
बलिया (उत्तरप्रदेश) 
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आठों याम जो जीती-मरती दिवा हो या रात्रि,
महिमा का जिसकी वर्णन ना हो,वो है जन्मदात्री।

हरदम दु:ख ले,सुख ही देती धैर्य में जैसे धारित्री,
खुद भूखे रह भोग लगाती,जय हो तेरी जन्मदात्री।

गीला हो जाए जब बिस्तर माघ में हो अँधियारी रात्रि,
शिशु को सूखे खुद गीले पर सो जाती है जन्मदात्री।

जग में सर्वोच्च माता का दर्जा समझ सके ना तंत्री,
दंभ तंत्र अहम जो छोड़े,करे कृपा तब जन्मदात्री।

कहें उमेश जननी को पूजो,तुम राजा हो या मंत्री,
माँ के चरणों में स्वर्ग की पूँजी,जय हो तेरी जन्मदात्रीll

परिचय-उमेशचन्द यादव की जन्मतिथि २ अगस्त १९८५ और जन्म स्थान चकरा कोल्हुवाँ(वीरपुरा)जिला बलिया है। उत्तर प्रदेश राज्य के निवासी श्री यादव की शैक्षिक योग्यता एम.ए. एवं बी.एड. है। आपका कार्यक्षेत्र-शिक्षण है। आप कविता,लेख एवं कहानी लेखन करते हैं। लेखन का उद्देश्य-सामाजिक जागरूकता फैलाना,हिंदी भाषा का विकास और प्रचार-प्रसार करना है।