नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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हिंदू धर्म में श्राद्ध का महत्व है बड़ा,
श्राद्ध में पितरों को तर्पण दिया जाता
पुण्य प्राप्त करने के लिए ही तो तर्पण किया जाता,
जीते जी अपने माता-पिता को तड़पाया
मरने पर पूरे शहर को भोज दिया।
बहुत अजीब रीत है हमारे यहाँ की,
मरने पर गंगा, और जीते जी एक गिलास पानी के लिए तरसाया
सबसे बड़ी चीज उनके पास रहना,
पर सब दूर-दूर रहते हैं, अपने काम से
जीते जी सम्मान भी नहीं देते,
मरने पर छप्पन भोग लगाना।
मैंने भी देखा कि वृद्ध को जीते-जी,
श्राद्ध कर लिया पत्नी के मरने के बाद अपना भी
मैंने पूछा, जीते जी अपना श्राद्ध क्यों किया ?
उन्हें कोई बेटा नहीं! फुर्सत नहीं मिलती!
बेटा करे या न करे, मैंने जीते जी श्राद्ध किया अपना,
जीते-जी अपने को ‘गया जी’ में बैठा लिया।
श्राद्ध की रस्म पूरी रीति-रिवाज के साथ करना,
आपकी आत्मा देखेगी, आपने क्या किया॥