तरक्की में बाधक के लिए दंड आवश्यक

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राधा गोयल
नई दिल्ली
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आज से नहीं…वर्षों से जिस दल का सबसे अधिक समय शासन रहा, उनके नेता दुबई जाते रहे हैं, लेकिन दुबई से कुछ नहीं सीखा। यदि सीख लेते तो आज भारत देश ने कितनी तरक्की कर ली होती। हमने तो एक बार जाकर यह बात महसूस की। दुबई से दूसरी फ्लाइट पकड़नी थी, जो अगले दिन सुबह की थी। वहाँ रात को भी खूब रोशनी थी। पूरा शहर घूमने का मौका मिला।
दुबई में चारों तरफ रेगिस्तान है या समुद्र का खारा पानी, इसके बावजूद जितनी तरक्की की है, उतनी अन्य किसी देश ने नहीं की। रेगिस्तान को नखलिस्तान कैसे बना सकते हैं, यह दुबई जाकर देखो। चारों तरफ झूमते-लहलहाते हुए पेड़। आलीशान बंगले व पाँच सितारा होटल। इतना बड़ा सात मंजिला शाॅपिंग मॉल है, जिसको घूमने के लिए एक दिन भी कम पड़ेगा।
शौचालय के पानी का इतना अच्छा बंदोबस्त। खेती के लिए खेतों में बाँस की खपच्चियों को चीर कर उनके बीच में थोड़ी-थोड़ी दूरी पर छेद किए हुए हैं और खेतों में १-१ फुट की दूरी पर बिछाई हुई हैं। शौचालय का तरल अपशिष्ट उनमें जाता है तो ठोस अपशिष्ट की खाद बनाई जाती है। खारा पानी होने के बावजूद ऊँचे-ऊँचे लहराते हुए पेड़ हैं। चारों तरफ हरियाली ही हरियाली है। तूफानी लहरें चलने पर समुद्र का पानी शहर को बर्बाद न कर पाए, उसके लिए काफी ऊँचाई तक सीढ़ियाँ बनाई हुई हैं जिन पर बैठकर लोग समुद्र को देखने का लुत्फ़ भी उठा सकते हैं। शहर घुमाने के लिए उनकी सिटी कार-टैक्सी चलती हैं, जिसमें गाइड भी होता है।
हवाई अड्डे तक जाने के लिए यंत्रचालित सड़क है। साफ-सुथरा वातानुकूलित हवाई अड्डा, विश्व के हर देश के व्यंजन वहाँ उपलब्ध हैं। देखकर आश्चर्य होता है कि, कोई रेगिस्तान को भी नखलिस्तान बना सकता है। दुबई दिनों-दिन तरक्की कर रहा है।
अब दुबई एमिरेट्स एयरलाइंस ने दुबई में दुनिया का सबसे बड़ा वर्टिकल गार्डन बनाया है। ३२० करोड रुपए की लागत से बना यह गार्डन ३.३० लाख वर्ग फुट में फैला है। इसमें रोजाना ३ हजार किलो सब्जियों का उत्पादन होगा। इस उद्यान को इस तरह डिजाइन किया गया है कि, इसमें सामान्य खेती के मुकाबले ९५ फीसदी कम पानी की खपत होगी और हर साल लगभग २५ करोड़ लीटर पानी बचेगा।
अब वर्तमान केन्द्र सरकार भी देश के विकास के लिए बहुत कुछ कर रही है, लेकिन हमारे देश के कुछ गुट-दल ऐसे हैं जो हर बात पर विरोध करने के लिए सड़कों पर उतर आते हैं। देश की जितनी प्रगति होती है, आगजनी और आंदोलन में सब-कुछ स्वाहा कर देते हैं। देश की प्रगति की रफ्तार रोक देते हैं। सारे विकास कार्यों का विनाश कर देते हैं, जबकि दुबई में ऐसा नहीं है। वहाँ हाथ काटने के बदले हाथ काट दिया जाता है। जान लेने के बदले जान ले ली जाती है। हमारे देश में बरसों मुकदमे ही चलते रहते हैं। अपराधी छूट जाता है, विचाराधीन कैदियों पर विचार ही नहीं किया जाता। निर्दोष होते हुए भी जेल की सजा भुगतने को अभिशप्त हैं कुछ तो वर्ग विशेष को अपनी मनमानी करने की आजादी है। आगजनी करने वाले यह नहीं सोचते कि, वे देश की प्रगति में कितनी बड़ी बाधा उत्पन्न कर रहे हैं और कितने लोगों को बेरोजगार कर रहे हैं। वे यह नहीं सोचते कि जिन मॉल, दुकानों, फैक्ट्रियों या कारखानों में आग लगा रहे हैं, रेलें तक जला रहे हैं, सरकारी और सार्वजनिक सम्पत्ति का नुकसान कर रहे हैं, उसके कारण जो लोग बेरोजगार हो रहे हैं, कभी सोचा कि वो रोटी कहां से खाएंगे ?
दुबई में यह सब-कुछ निषेध है, तभी दुबई इतनी तरक्की कर पाया है। किसी की जुर्रत नहीं है कि वह आगजनी जैसी घटनाओं को अंजाम दे पाए, क्योंकि उनको मालूम है कि, उनका क्या अंजाम होगा।
दुबई की तरह देश के विकास के लिए कुछ कठोर कानून तो बनाने ही पड़ेंगे। जो लोग देश की तरक्की की रफ्तार में बाधा पैदा करते हैं, उनके लिए कठोर दंड का प्रावधान करना पड़ेगा, वरना हम निर्माण कार्यों में पैसा लगाते रहेंगे और वे तोड़-फोड़ करके सब-कुछ नष्ट करते रहेंगे।

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