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तुम हो

अंतुलता वर्मा ‘अन्नू’ 
भोपाल (मध्यप्रदेश)
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जहां भी देखूं,हर जगह तुम हो,
मेरे लबों की,हँसी तुम हो।
मेरी हर साँस के महकने की,वजह तुम हो…
मैं जो जी रही हूँ,मेरे जीने की वजह तुम हो…॥

मेरी हर नज़र में,बसे तुम हो,
मेरी हर कलम पर,लिखे तुम हो।
मेरे दिल के,धड़कने की वजह तुम हो…
मैं जो जी रही हूँ,मेरे जीने की वजह तुम हो…॥

तुझे लिखूं तो,ग़ज़ल तुम हो,
तुझे सोचूं तो, ख्वाब तुम हो।
तुझे पा के महकने की,वजह तुम हो…
मैं जो जी रही हूँ,मेरे जीने की वजह तुम हो…॥

मेरी हर इबादत भी,तुम हो,
मेरी दिल्लगी,दीवानगी भी तुम हो।
मेरी पहली और आखिरी चाहत की,वजह तुम हो…
मैं जो जी रही हूँ,मेरे जीने की वजह तुम हो…॥

मुश्किल भी तुम हो,हल भी तुम हो,
मेरे सीने की हलचल भी,तुम हो।
खामोशियों में भी गुनगुनाने की वजह तुम हो…
मैं जो जी रही हूँ,मेरे जीने की वजह तुम हो…॥

महकती हवा की खुशबू में,तुम हो,
मेरी ज़िंदगी के महकने की,हकीकत तुम हो।
तुझे चाहकर बहकने की,वजह तुम हो…
मैं जो जी रही हूँ,मेरे जीने की वजह तुम हो…॥

मेरी तन्हाई भी तुम हो,
मेरी रुसवाई भी तुम हो।
मेरे रात-दिन मुस्कुराने की,वजह तुम हो…
मैं जो जी रही हूँ,मेरे जीने की वजह तुम हो…॥

सच भी तुम हो,झूठ भी तुम हो,
पास भी तुम हो,दूर भी तुम हो।
मेरे खड़े रहने की वजह तुम हो…
मैं जो जी रही हूँ,मेरे जीने की वजह तुम हो…॥

मैं ज़िंदा हूँ,जब मेरे पास तुम हो,
मैं मुकम्मल हूँ,जब साथ तुम हो।
मैं तुम में हूँ,तुममें होने की वजह तुम हो…
अब सब तुम हो…तुम ही हो…तुम ही हो…।
मैं जो जी रही हूँ,मेरे जीने की वजह तुम हो…॥

परिचय-श्रीमती अंतुलता वर्मा का साहित्यिक उपनाम ‘अन्नू’ है। ११ मई १९८२ को विदिशा में जन्मीं अन्नू वर्तमान में करोंद (भोपाल)में स्थाई रुप से बसी हुई हैं। हिंदी,अंग्रेजी और गुजराती भाषा का ज्ञान रखने वाली मध्यप्रदेश की वासी श्रीमती वर्मा ने एम.ए.(हिंदी साहित्य),डी.एड. एवं बी.एड. की शिक्षा प्राप्त की है।आपका कार्यक्षेत्र-नौकरी (शास. सहायक शिक्षक)है। सामाजिक गतिविधि में आप सक्रिय एवं समाजसेवी संस्थानों में सहभागिता रखती हैं। लेखन विधा-काव्य,लघुकथा एवं लेख है। अध्यनरत समय में कविता लेखन में कई बार प्रथम स्थान प्राप्त कर चुकी अन्नू सोशल मीडिया पर भी लेखन करती हैं। इनकी विशेष उपलब्धि-चित्रकला एवं हस्तशिल्प क्षेत्र में कई बार पुरस्कृत होना है। अन्नू की लेखनी का उद्देश्य-मन की संतुष्टि,सामाजिक जागरूकता व चेतना का विकास करना है। पसंदीदा हिन्दी लेखक-महादेवी वर्मा,मैथिलीशरण गुप्त, सुमित्रा नन्दन पंत,सुभद्राकुमारी चौहान एवं मुंशी प्रेमचंद हैं। प्रेरणा पुंज -महिला विकास एवं महिला सशक्तिकरण है। विशेषज्ञता-चित्रकला एवं हस्तशिल्प में बहुत रुचि है। देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-“हमारे देश में अलग-अलग भाषाएं बोली जाती है,परंतु हिंदी एकमात्र ऐसी भाषा है जो देश के अधिकांश हिस्सों में बोली जाती है,इसलिए इसे राष्ट्रभाषा माना जाता है,पर अधिकृत दर्जा नहीं दिया गया है। अच्छे साहित्य की रचना राष्ट्रभाषा से ही होती है। हमें अपने राष्ट्र एवं राष्ट्रीय भाषा पर गर्व है।