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तू ही तू

सुषमा दुबे
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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धीर है तू सत्य है तू खौलता उफान है,
तू अर्चना आराधना तू भक्ति का वरदान है।
प्रचंड तू अखंड भी तू ही शक्तिमान है,
भैरवी कानुप्रिय तू विश्व का गुणगान है।

रौद्र रूप रच सके तू ऐसा एक तूफान है,
तू गंगा-सी पवित्र है समुद्र-सी विशाल है।
तू रागिनी तू बांसुरी तू भोर की अजान है,
तू जननी है तू लक्ष्मी है इस विश्व का सम्मान है।

कपाली तू भवानी तू वीरता की खान है,
तू कालिका तू दामिनी तू वज्र के समान है।
तू लाड़ली तू संगिनी तू ममता का प्रमाण है,
तेरे कदम जहां पड़े वहाँ बने निशान है।

तू हंसिनी,वसंतिनी तू मंगला का गान है,
तू रक्तिमा तू चंडिका तू तीर है कमान है।
दुर्गा तू तू चंडिका सरस्वती का ज्ञान है,
तुझे न कोई छू सके तू ऐसा कीर्तिमान है॥