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दहेज़

डॉ.रामावतार रैबारी मकवाना ‘आज़ाद पंछी’ 
भरतपुर(राजस्थान)
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आज भी लोग सरेआम दहेज़ लेते हैं,
पर वो नालायक है बेटी वाले जो दहेज़ देते हैं
फिर जिंदगीभर लोगों के सामने रो-रोकर कहते हैं,
कि बेटे वाले मेरी बेटी को दु:ख देते हैं।

दबा देते हैं बेटियों को दहेज़ के तले,
फिर बेटियाँ जिंदगी भर रोती हैं
मजबूर हो जाती है आत्महत्या के लिए,
क्योंकि बेटियाँ जो जिंदगीभर दहेज़ का बोझ ढोती हैं।
जानते हुए भी लोग बेटी का सौदा कर देते हैं,
और फिर जिंदगीभर रो-रोकर कहते हैं,
कि बेटे…॥

कहते हैं लोग-
सुना है कि बेटियाँ लक्ष्मी का रूप होती हैं,
जिस घर में बेटी के कदम पड़े
उस घर में खुशियां होती हैं,
बेटी तो फूलों के जैसी नाजुक होती है
उसके बिना तो सारी रंगरलियां,
गाँव की गलियाँ फीकी होती हैं।
जानते हुए भी बेटी के जीवन में ज़हर भर देते हैं।
और फिर लोगों के सामने रो-रोकर कहते हैं
कि बेटे वाले…॥

कहते हैं लोग-
कि क्या बेटी-बेटों से कम होती है,
सुख-दु:ख में जितना बेटा शामिल होता है
उतनी ही सुख-दु:ख में बेटी शामिल होती है।
फिर बेटा,बेटा ही और बेटी,बेटी ही क्यों होती है,
क्या बेटी,बेटों से कुछ कम होती है।
सब कुछ जानते हुए भी बेटा-बेटी में अंतर डाल देते हैं,
और फिर लोगों के सामने रो-रो कर कहते हैं,
कि बेटे वाले…॥

कहते हैं लोग-
कि बेटी से ही संसार चलता है,
और परिवार का वंश चलता है
बेटी के ममता के आँचल में ही,
दुनिया का हर बेटा पलता है।
इतना ही नहीं आज हम सबका समय भी
बेटी से ही पल-पल चलता है,
जानते हुए भी बेटी को जन्म से पहले ही माँ के गर्भ में मार देते हैं।
और फिर लोगों के सामने रो-रोकर कहते हैं,
कि बेटे वाले…॥

क्या बेटियाँ बेटों से कमजोर होती हैं,
या बेटियाँ माँ-बाप पर एक बोझ होती हैं
बेटियाँ रात को केवल चार घण्टे सोती हैं,
बाकी बीस घण्टे हमको ढोती हैं।
इतना सब कुछ जानते हुए भी,
हम क्या कभी बेटी को सुख देते हैं..!
और फिर लोगों के सामने रो-रोकर कहते हैं,
कि बेटे वाले…॥

मैं कहता हूँ-
अगर हम दहेज़ ना दें तो,
क्या बेटियां कुँवारी रह जाएंगी
या फिर भूख से भूखी मर जायेगी।
कमाकर फिर बनाकर खाना जानती है बेटियाँ,
असली शामत तो दहेज़ लेने वालों की आयेगी,
जब सुबह मुँह पर हाथ फेरेंगें तो दाढ़ी-मूँछ जली पायेगी।
जानते हुए भी लोग ऐसे लोगों के दाढ़ी-मूँछ जलने नहीं देते हैं,
और फिर लोगों के सामने रो-रो कर कहते हैं,
कि बेटा वाले…॥

मैं कहता हूँ….
‘अवतार’ आज आप लोगों के सामने कहता है,
कि ना तो दहेज़ लेता है और ना दहेज देता है।
मर्जी है समाज में बैठे बेटा-बेटी वालों की,
कौन बिना दहेज़ के बेटा देता है या बेटी लेता है।
हम नहीं दहेज़ लेते हैं,तभी तो आपसे कहते हैं,
कि बेटे वालों को क्यों भर-भर थैला देते हैं ?
और फिर लोगों के सामने रो-रोकर कहते हैं-
कि बेटे वाले मेरी बेटी को दु:ख देते हैं…॥

परिचय-डॉ.रामावतार रैबारी मकवाना की जन्म तारीख-२० अप्रैल १९८४ एवं जन्म स्थान -नावली है। साहित्यिक उपनाम ‘आज़ाद पंछी’ से पहचाने जाने वाले डॉ.मकवाना वर्तमान में राजस्थान स्थित गाँव-नावली जिला-भरतपुर में स्थाई निवासी हैं। आप हिन्दी और राजस्थानी भाषा का ज्ञान रखते हैं। बी.ए. एवं बी.एस-सी. (नर्सिंग) तक शिक्षित होकर बतौर चिकित्सक स्वयं का दवाखाना संचालित करते हैं। सामाजिक गतिविधि के तहत समाजसेवा में सक्रिय हैं। लेखन विधा-कविता,कहानी व ग़ज़ल है। प्रकाशन में-शुभारम्भ(साँझा काव्य संग्रह) आपके नाम है। आपको साहित्य क्षेत्र में श्री नर्मदा साहित्य सम्मान और भारत गौरव रत्न सम्मान मिला है। लेखनी का उद्देश्य-समाज को जागृत करना है। मुंशी प्रेमचंद एवं हरिवंशराय बच्चन को पसंदीदा लेखक मानने वाले ‘आजाद पंछी’ के लिए अटल बिहारी वाजपेयी प्रेरणापुंज हैं।