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दिले-दर्द अपना सुनाते नहीं

प्रदीपमणि तिवारी ध्रुव भोपाली
भोपाल(मध्यप्रदेश)
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(वज़्न-१२२×३-१२, अर्कान-फऊलुन×३-फआ)
बुलाए बिना हम हैं जाते नहीं।
अग़र बोझ समझा निभाते नहीं।

अदब से मिले जो भी मंज़ूर वो,
कि ख़ैरात को हम उठाते नहीं।

बरस बीत जाएं नहीं बात हो,
दिले-दर्द अपना सुनाते नहीं।

कई ज़ख़्म दिल में बता ना सकें,
उधारी का मरहम लगाते नहीं।

सियासत नहीं इश्क में चाहते,
परेशां हुए हम बताते नहीं।

हुआ इश्क सौदा ये बाज़ार में,
कभी रूह में अब बिठाते नहीं।

अगर चाह मेरी तरह ‘ध्रुव’ तुम्हें,
फ़साने भला क्यूं सुनाते नहीं॥

परिचय–प्रदीपमणि तिवारी का लेखन में उपनाम `ध्रुव भोपाली` हैl आपका कर्मस्थल और निवास भोपाल (मध्यप्रदेश)हैl आजीविका के लिए आप भोपाल स्थित मंत्रालय में सहायक के रुप में कार्यरत हैंl लेखन में सब रस के कवि-शायर-लेखक होकर हास्य व व्यंग्य पर कलम अधिक चलाते हैंl इनकी ४ पुस्तक प्रकाशित हो चुकी हैंl गत वर्षों में आपने अनेक अंतर्राज्यीय साहित्यिक यात्राएँ की हैं। म.प्र.व अन्य राज्य की संस्थाओं द्वारा आपको अनेक मानद सम्मान दिए जा चुके हैं। बाल साहित्यकार एवं साहित्य के क्षेत्र में चर्चित तथा आकाशवाणी व दूरदर्शन केन्द्र भोपाल से अनुबंधित कलाकार श्री तिवारी गत १२ वर्ष से एक साहित्यिक संस्था का संचालन कर रहे हैं। आप पत्र-पत्रिका के संपादन में रत होकर प्रखर मंच संचालक भी हैं।

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