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दिव्य दिवाकर

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला(मध्यप्रदेश)
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दिव्य दिवाकर,नाथ प्रभाकर, देव आपको, नमन करूँ।
धूप-ताप तुम,नित्य जाप तुम,करुणाकर हे!, तुम्हें वरूँ॥
नियमित फेरे,पालक मेरे,उजियारा दो, पीर हरो।
दर्द लड़ रहा,पाप अड़ रहा,नेह करो हे!, शक्ति भरो॥

सबको वरते,जगमग करते,हे! स्वामी तुम, सकल धरा।
मन है गाया,जीवन पाया,नवल ताज़गी, लोक वरा॥
तुम भाते हो,मुस्काते हो,जीव सभी ही, प्राण वरें।
धूप लुभाती,मौसम लाती,किरणें सबका, शोक हरें॥

शक्तिमान तुम,धैर्यवान तुम,,गति साधे हो, तेज बढ़ो।
दिखता काला,वहाँ उजाला,बिखराओ अब, नेह मढ़ो॥
दुर्बल काया,बिखरी माया,अर्ज़ करूँ मैं, नाथ सुनो।
हे! नभस्वामी,अंतर्यामी,देव प्रखरतम, फूल बुनो॥

है अँधियारा,दो उजियारा,लिए दिव्यता, मान चुनो।
दयासिंधु हो,दीनबंधु हो,हे! जगपालक, गान गुनो॥
कितना दु:ख है,रोता सुख है,घबराया नर, भोर करो।
दया करो अब,नेह झरोअब,देव दिवाकर, शोर हरो॥

उजियारे पल,हारे हर छल,देव दिवाकर, हाथ गहो।
कर्मठ शाही,नभपथराही,प्रीत बढ़ाओ, रोज़ बहो॥
खुशियाँ रचते,नीती सृजते,गहन तिमिर को, मात करो।
चुप ना रहना,सदा विहँसना,होकर मुखरित, बात करो॥

परिचय–प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे का वर्तमान बसेरा मंडला(मप्र) में है,जबकि स्थायी निवास ज़िला-अशोक नगर में हैL आपका जन्म १९६१ में २५ सितम्बर को ग्राम प्राणपुर(चन्देरी,ज़िला-अशोक नगर, मप्र)में हुआ हैL एम.ए.(इतिहास,प्रावीण्यताधारी), एल-एल.बी सहित पी-एच.डी.(इतिहास)तक शिक्षित डॉ. खरे शासकीय सेवा (प्राध्यापक व विभागाध्यक्ष)में हैंL करीब चार दशकों में देश के पांच सौ से अधिक प्रकाशनों व विशेषांकों में दस हज़ार से अधिक रचनाएं प्रकाशित हुई हैंL गद्य-पद्य में कुल १७ कृतियां आपके खाते में हैंL साहित्यिक गतिविधि देखें तो आपकी रचनाओं का रेडियो(३८ बार), भोपाल दूरदर्शन (६ बार)सहित कई टी.वी. चैनल से प्रसारण हुआ है। ९ कृतियों व ८ पत्रिकाओं(विशेषांकों)का सम्पादन कर चुके डॉ. खरे सुपरिचित मंचीय हास्य-व्यंग्य  कवि तथा संयोजक,संचालक के साथ ही शोध निदेशक,विषय विशेषज्ञ और कई महाविद्यालयों में अध्ययन मंडल के सदस्य रहे हैं। आप एम.ए. की पुस्तकों के लेखक के साथ ही १२५ से अधिक कृतियों में प्राक्कथन -भूमिका का लेखन तथा २५० से अधिक कृतियों की समीक्षा का लेखन कर चुके हैंL  राष्ट्रीय शोध संगोष्ठियों में १५० से अधिक शोध पत्रों की प्रस्तुति एवं सम्मेलनों-समारोहों में ३०० से ज्यादा व्याख्यान आदि भी आपके नाम है। सम्मान-अलंकरण-प्रशस्ति पत्र के निमित्त लगभग सभी राज्यों में ६०० से अधिक सारस्वत सम्मान-अवार्ड-अभिनंदन आपकी उपलब्धि है,जिसमें प्रमुख म.प्र. साहित्य अकादमी का अखिल भारतीय माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार(निबंध-५१० ००)है।

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