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तेरे बिना..

कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,
हैदराबाद (तेलंगाना)
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बिना तेरी याद
कैसे गुज़रेगा दिन,
बिना तेरे नाम
कैसे चले ये दिन।

बिना तेरी बात
कैसे कटेगी शाम,
बिना तेरे साथ
कैसे मिले आराम।

बिना तेरी हँसी
कैसे खिलेगा मन,
बिना तेरी खुशी
कैसे सजेगा जीवन।

बिना तेरे ख़्वाब
कैसे आएगी नींद,
बिना तेरे जवाब
कैसे मिलेगी जीत।

बिना तेरे स्पर्श
कैसे महकेगी साँस,
बिना तेरे हर्ष
कैसे जगेगी आस।

बिना तेरे प्यार
कैसे धड़केगा दिल,
बिना तेरे दीदार
कैसे होगी मंज़िल।

बिना तेरे साथ
कैसे कटेगा सफ़र,
बिना तेरे हाथ
कैसे मिलेगा असर।

बिन तेरे यह जीवन जैसे
सूना-सा उपवन लगता है,
तेरे बिना हर उत्सव भी
अधूरा-अधूरा लगता है।

आ जा कि मेरे शब्दों को,
फिर से कोई अर्थ मिले।
मेरी बिखरी साँसों को,
तेरे प्रेम का स्पर्श मिले॥

परिचय – कवि व अनुवादक कमलेकर नागेश्वर राव का साहित्यिक उपनाम ‘कमल’ है। आप सरकारी अध्यापक (हिंदी) ने रूप में जिला नागर कर्नूल के वेल्दंडा में कार्यरत हैं। तेलंगाना राज्य के रंगा रेड्डी जिले में निवासरत ‘कमल’ की तेलुगू और हिंदी के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ व विशेष आलेख प्रकाशित होते रहते हैं। इनको श्री श्री कला वेदिका राजमंड्री वालों से ‘साहिती मित्रा’ पुरस्कार, आदित्य संस्कृति (मप्र) से ‘हिंदी सेवी’ तथा डाॅ.सीता किशोर खरे स्मारक साहित्य पुरस्कार आदि मिले हैं।