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दुनियादारी

राधा गोयल
नई दिल्ली
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‘दयाहीनं निष्फलं स्यान्नास्ति धर्मस्तु तत्र ही।
ऐते वेदा अवेदा: स्युर्दया यत्र न विद्यते॥’
  यानी बिना दया के किए गए काम में कोई फल नहीं मिलता। ऐसे काम में धर्म नहीं होता। जहाँ दया नहीं होती, वहाँ वेद भी अवैध हो जाते हैं। इसी सोच और संकल्प के साथ राजकोट से २२२२ किलोमीटर दूर देश का सबसे बड़ा वृद्ध आश्रम तैयार हो रहा है। बेसहारा निराश्रित बीमार-लाचार बुजुर्गों का यह ‘पाँच सितारा’ घर होगा। बुजुर्गों को अपने घर का एहसास दिलाने के लिए ३० एकड़ की विशाल जगह में ११-११ मंजिल के ७ टॉवर बनाए जा रहे हैं। हर मंजिल पर १६ कमरे (कुल १४०० कमरे) होंगे, जहां ५००० बुजुर्गों को आश्रय मिलेगा। ग्राउंड पर २ मंजिला डाइनिंग हॉल होगा। लाइब्रेरी, योग रूम प्रार्थना कक्ष भी बनेंगे। पूरा प्रोजेक्ट २०२७ में तैयार हो जाएगा। इस सुविधा आश्रम का नाम ‘सद्भावना धाम’ होगा।
     इसका निर्माण राजकोट के उद्योगपति विजय भाई डोबरिया करवा रहे हैं। उनका कहना है कि आज के बच्चों में दुनियादारी बिल्कुल नहीं है। माता-पिता को अपने साथ रखना नहीं चाहते। निराश्रित अकेले बुजुर्ग आखिर कहाँ जाएंगे।
  “काम तो बहुत अच्छा कर रहे हैं। लेकिन इसमें तो बहुत लागत आएगी।” विनीत ने पूछा।
    “सही कहा विनीत। बहुत लागत आएगी। ३०० करोड़ रुपए की लागत से यह वृद्ध आश्रम बन रहा है। २०० लोगों की टीम दिन-रात काम कर रही है।”
   “तो पैसा कहाँ से आ रहा है ?”
   ” यह पूरा पैसा दान से आ रहा है। हमारे देश में ऐसे काम के लिए दानवीरों की कमी नहीं है। आजकल तो हर कोई चाहता है कि बुजुर्गों का अकेलापन दूर करने के लिए कोई ऐसी संस्था हो, जहाँ उन्हें उपेक्षित न समझा जाए।”      
   “बुढ़ापे में तो बीमारियाँ भी बहुत सताती हैं। क्या उनका भी इन्तजाम है ?”
   “बिल्कुल है। हर टॉवर में अस्पताल होगा। जरूरत पड़ने पर मरीज को भर्ती भी किया जा सकेगा। एक विशाल गार्डन पार्टी प्लॉट भी बनाया जा रहा है। निराश्रित बुजुर्गों की सुविधाओं को देखते हुए हर छोटी-छोटी बात का ध्यान रखा गया है।”
    “यह विचार उन्हें कहाँ से आया।”
      “विजय भाई डोबरिया एक बार कहीं जा रहे थे, तो उन्होंने रास्ते में एक बुजुर्ग को ठेला चलाते हुए देखा। वह रो रहा था। उसके पैर में चप्पल भी नहीं थी। पूछने पर उसने बताया कि वह ७० साल का हो चुका है। पहले फर्नीचर की दुकान पर काम करता था, लेकिन अब उसे कोई काम भी नहीं देता। घर भी नहीं जा पाता, क्योंकि पत्नी भूखी है। क्या जवाब दूँ। घर का भाड़ा ६०० ₹ है, वह भी कई महीने से नहीं दिया। उसकी यह हालत देखकर उन्होंने उसे १ महीने का राशन दिया।
     मजदूर ठेला रिक्शा चलाने वाले लोगों को ठंडा पानी मिलता रहे, इसलिए शहर में १०० जगह पर ठंडे पानी की व्यवस्था करवाई। गरीबों को सस्ती दर पर दवाएँ देने के लिए सद्भावना मेडिकल स्टोर बनवाए गए हैं। यहाँ मरीजों को १५ से ६० प्रतिशत की छूट पर दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। ग्रीन गुजरात के लिए राज्य भर में ३० लाख पेड़ लगवाए, साथ ही उनकी सुरक्षा के लिए टीम बनाई।
  बुजुर्ग सबसे ज्यादा परेशान अकेलेपन से होते हैं। इस फाइव स्टार सोसाइटी में एक खास टीम होगी, जिसका काम होगा बुजुर्गों को सुनना। उनके किस्से, गुस्से, उनकी परेशानी, उनके सुख-दु:ख को प्यार से सुनना। इस टीम को सिर्फ इसी काम के लिए सैलरी दी जाएगी। इसकी लगातार निगरानी भी होगी। बुजुर्गों की देख-रेख और सुविधा के लिए करीब १०० प्रोफेशनल लोगों की टीम होगी, जिन्हें वेतन दिया जाएगा।”
   “बड़ा अच्छा काम कर रहे हैं ये। मैं भी इनकी टीम में शामिल होकर लोगों के दु:ख बाँटने का काम करूँगा।”
   “यानि अब तू ‘दुनियादारी’ का गुर सीख गया है।”