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उच्च न्यायपालिका में हिंदी के लिए बंद दरवाजों को धक्का देना पड़ेगा

गोष्ठी….

पटना (बिहार)।

राष्ट्रपति के आदेश १९६० में यह कहा गया था कि उचित समय आने पर सर्वोच्च न्यायालय की भाषा अंततः हिंदी होगी। इसी प्रकार उच्च न्यायालय के लिए भी कहा गया था कि उनकी भाषा उचित समय आने पर हिंदी अथवा राज्य की भाषा होगी, लेकिन उस आदेश को आए हुए ६६ वर्ष हो चुके हैं, अभी तक इस दिशा में कुछ नहीं किया गया है। इसलिए न केवल न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर बंद दरवाजों को धक्का देना पड़ेगा।
   यह बात ‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ के निदेशक एवं विशिष्ट वक्ता डॉ. मोतीलाल गुप्ता ‘आदित्य’ ने राजेंद्र सभागार एडवोकेट एसोसिएशन, पटना उच्च न्यायालय में आयोजित विचार गोष्ठी में कही। हिंदी पखवाड़ा २०२६ के संदर्भ में अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति के सौजन्य से यह आयोजन हुआ, जिसमें विषय ‘उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों में हिंदी का प्रयोग’ था। अधिवक्ता सह पूर्व स्थाई सलाहकार इंद्रदेव प्रसाद ने कहा कि मैं जब से अधिवक्ता बना हूँ, तभी से पटना उच्च न्यायालय में हिंदी में हिंदी में वकालत करता आ रहा हूँ और हिंदी विरोधी नियम-कानून का विरोध करता आ रहा हूँ जिससे संबंधित सुनवाई प्रक्रिया का एक वीडियो भी प्रसारित हुआ है, जिसका संज्ञान तत्कालीन केंद्रीय विधि मंत्री किरण रिजीजू से लेकर बार काउंसिल आफ इंडिया एवं बिहार बार काउंसिल के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित राष्ट्रीय विचार गोष्ठी में बोला गया है कि अब कोर्ट प्रोसीडिंग्स का भी वीडियो वायरल होता है, जिसे देखने से पता चलता है कि कुछ न्यायमूर्ति यह बोलकर हिंदी आवेदन को रोक दे रहे हैं कि मुझे हिंदी समझ में नहीं आती है, जो ठीक नहीं है। जो न्यायमूर्ति ठीक से हिंदी नहीं समझ पाते हैं, उन्हें हिंदी नहीं रोकना चाहिए, उन्हें अनुवादक यंत्र का इस्तेमाल करना चाहिए।  
    सभाध्यक्ष धर्मनाथ प्रसाद यादव ने कहा कि हिंदी में न्याय को रोकने के लिए जो अपराध इंद्रदेव जी के साथ हुआ है ,वह असहनीय है। संगठन उनके साथ खड़ा है और संविधान के दायरे में रहकर संगठन जो कुछ भी कर सकता है, कर रहा है। अखिल अखिल भारतीय भाषा संरक्षण संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरपाल सिंह राणा, वैश्विक हिंदी सम्मेलन के निदेशक डॉ. गुप्ता, हिंदी सेवा निधि इटावा के महासचिव सह वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप कुमार, हिंदी सलाहकार समिति भारत सरकार के सदस्य वीरेंद्र कुमार यादव आदि से प्रेरणा लेकर हमने इनके मुद्दे को समिति के मुद्दों में सम्मिलित किया है, मुद्दा उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों में हिंदी को स्थापित करना है। सभी संस्थाओं को एकजुट होकर इस मुद्दे पर विचार करने की जरूरत है। देशव्यापी आंदोलन खड़ा करने की जरूरत है।
वीरेंद्र कुमार यादव ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि विदेशों में तो हिंदी में बात की बात की जा सकती है, किंतु अपने देश में हिंदी विकास की  बात करना बहुत कठिन कार्य है, जो इंद्रदेव जी की कहानी से सिद्ध होता हुआ प्रतीत होता है।
   अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रणविजय सिंह ने कहा कि अब याचना नहीं, रण होगा।
    उपस्थित अनेक विद्वानों ने भी  सभा को संबोधित किया।

(सौजन्य:वैश्विक हिंदी सम्मेलन, मुम्बई)…