कुल पृष्ठ दर्शन : 242

You are currently viewing नए कवियों को चाहिए कि वे खूब पढ़ें

नए कवियों को चाहिए कि वे खूब पढ़ें

पटना (बिहार)।

सार्थक मुक्तछंद कविता भी वही लिख सकता है, जिसे छंद का अच्छा ज्ञान हो, जबकि मुख्यधारा के अधिकांश कवि भी कविता के नाम पर गद्य लिख रहे हैं। नए कवियों को चाहिए कि वे खूब पढ़ें और जो लिखें उसे बार-बार स्वयं दोहराने की कोशिश करें।
मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ गीतकार हरिनारायण सिंह हरि ने यह बात भारतीय युवा साहित्यकार परिषद के तत्वाधान में ‘पाठशाला’ का आरंभ करते हुए कही। इस अवसर पर संयोजक सिद्धेश्वर ने कहा कि, मुक्तछंद कविता में यदि काव्य बिम्ब न हो, तो वह सपाट यानी गद्य है। उसे कविता कदापि नहीं कहा जा सकता, बल्कि वह वैचारिक सपाट बयानी वाला गद्य है, जिसे कविता का नाम देकर पाठकों को भ्रमित कर रहे हैं आज के कई समकालीन कवि। नए और युवा कवियों के चाहिए कि निराला, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, केदारनाथ सिंह, पाश जैसे समर्थ कवियों की मुक्तछंद कविताओं को पढ़ें और सीखें।

आयोजन में इनके अतिरिक्त पुष्प रंजन, राज प्रिया रानी, ऋचा वर्मा, मंजू गुप्ता और इंदू उपाध्याय आदि ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज की और चर्चा में भाग लिया।

Leave a Reply