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‘नकारात्मकता’ नहीं, सकारात्मक बातों से प्रभावित हों

डॉ.अरविन्द जैन
भोपाल(मध्यप्रदेश)
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आज के समय में हर दूसरा व्यक्ति ना जाने कितनी बातों से परेशान है और परेशानियों के चलते नकारात्मक सोच का शिकार बन जाता है। हालत ऐसी है कि, यदि एक राह चलते हुए व्यक्ति से पूछ लिया जाए कि वो किसी बात से परेशान है तो वो अपनी बहुत-सी परेशानियाँ बताने लगेगा। लोग नकारात्मक सोच से भर से गए हैं और इस कारण बहुत दुखी महसूस करते हैं। समझ नहीं पाते कि इस नकारात्मक सोच को ख़त्म कैसे करें ?
सोच नकारात्मक हो या सकारात्मक, दोनों ही हमारे मस्तिष्क की उपज है। नकारात्मक सोच हमें मानसिक तौर पर बहुत परेशान कर देती है, और इस सोच का नकारात्मक असर शरीर पर भी दिखने लगता है। ‘नकारात्मक’ शब्द सुनकर घबराने से अच्छा है कि, आप सकारात्मक सोच की तरफ बढ़ें। हर वो मुमकिन प्रयास करें, जिससे आप इस नकारात्मक सोच को दूर कर सकें। आपको अपनी इस जीवन-शैली में कुछ सकारात्मक बदलाव लाने होंगे।
नकारात्मक सोच या विचार का अर्थ है-एक व्यक्ति के मन में कोई भी ऐसा विचार आना, जो उसे दुखी करे या जिसे सोच वह डरने लगे। मन में नकारात्मक विचार आना बहुत बड़ी बात नहीं हैं। एक मनुष्य कई तरह के विचारों से घिरा होता है, अलग-अलग तरह की भावनाओं से गुज़रता है, लेकिन प्रयास करना चाहिए कि ऐसा कोई भी विचार, जो मानसिक और शारीरिक तौर पर नुक़सान पहुचाएं, उसे जड़ से खत्म करें।
नकारात्मक विचार आने के कई कारण हो सकते हैं जैसे-अपने आप को दूसरों से कम आंकना, दूसरों की उन्नति देखकर ईर्ष्या का भाव मन में रखना, किसी का आपके काम या शरीर पर नकारात्मक टिप्पणी करना, कल क्या होगा इस चिंता में रहना, यदि आपके साथ कोई बुरी घटना घटी है तो हमेशा इस डर में जीना कि आपके साथ कुछ बुरा होगा, यदि जीवन में बुरा समय चल रहा है तो ये सोचना कि, ये समय कभी ठीक नहीं हो पाएगा, नकारात्मक समाचार पढ़ना, नकारात्मक सोच वाले लोगों से बात करना आदि।
हमेशा ध्यान रखें कि आप अपने शरीर और चेहरे से कई गुना बढ़ कर हैं। आपका अपना एक व्यक्तित्व है, और अपनी एक सोच है, जो दूसरों से अलग बनाती हैं। इसीलिए जो आप पर नकारात्मक टिप्पणी करते हैं, उनमें खुद बहुत-सी कमियां होती हैं, इसलिए ऐसे लोगों की बातों पर कभी ध्यान ना दें।
नकारात्मक सोच से दूर रहने के लिए सकारात्मक बातों के बारे में सोचें। जब भी आप किसी बात को सोचकर नकारात्मकता और दुःख से भर जाते हैं, तभी बिना समय गवाएं उन बातों के बारे में सोचिए, जो अच्छी हैं। चाहे वो आपकी पदोन्नति हो या आपके काम की तारीफ हो या घरवालों के साथ ज़्यादा समय बिता पा रहे हों।
हमेशा अच्छी और सकारात्मक बातों से प्रभावित हों। परेशानियों से प्रभावित और हताश होने के बजाय उनका समाधान निकालने का प्रयास करें। जब सकारात्मक बातों के बारे में सोचेंगे, तो परेशानी से लड़ने की हिम्मत अपने-आप आएगी।
कई बार ऐसा होता है कि जब हमारे साथ कोई बुरी घटना घटती है तो हम अपनी किस्मत को दोष देने लगते हैं। भगवान् को याद करके कहते हैं, “हे भगवान मेरे साथ ही क्यों होता है ऐसा ?” क्योंकि हमें लगता है कि हम दुनिया का हर सुख पाने का हक़ रखते हैं, लेकिन दुःख झेलने का नहीं। सच तो यह है कि यह जीवन ऐसे नहीं चलता। इसमें सुख भी हैं, तो दुःख भी। सुख की घड़ी हो, या दुःख की, आपको कुछ ना कुछ ज़रूर सिखाती हैं। इसी लिए हर दिन आभार प्रकट कीजिए।
आप नकारात्मक सोच रखने वाले लोगों से दूर रहें, साथ ही नकारात्मक समाचार से भी दूर रहें।
कोशिश करें कि सुबह उठकर आप दिन की शुरुआत मधुर संगीत या अच्छी किताब से करें और रात को सोने से पहले भी एक अच्छी किताब पढ़ें या सुविचार सुनें।
नकारात्मक सोच से दूर रहना है, तो जिन बातों पर आपका नियंत्रण नहीं है, उनके बारे में मत सोचिए। ऐसे ही नकारात्मक सोच को दूर करना है, तो योग या साधना करें।
यदि आप लम्बे समय से नकारात्मकता से घिरे हुए हैं तो योग, साधना या मंत्र जाप करें। इन सभी का आपके मन और मस्तिष्क पर एक बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है और आप बहुत सकारत्मक महसूस करते हैं।
जब भी आपके मन में कोई नकारात्मक विचार आये तो विख्यात व्यक्तित्वों के सकारात्मक कथन पढ़ें-
-भाग्य उनका साथ देता है जो हर संकट का सामना करके भी अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ रहते हैं। (चाणक्य)
-हर व्यक्ति में कुछ विशेष गुण और कुछ विशेष प्रतिभाएं होती हैं, इसलिए व्यक्ति को सफलता प्राप्त करने के लिए अपने गुणों की पहचान करनी चाहिए। (रतन टाटा)
-जितना कठिन संघर्ष होगा, जीत उतनी ही शानदार जीत होगी। (थॉमस पेन)
-आस्था वो पक्षी है, जो सुबह अँधेरा होने पर भी उजाले को महसूस करती है। (रबीन्द्रनाथ टैगोर)
-जब तक हम किसी काम को शुरू नहीं करते, तब तक वो नामुमकिन ही लगता है। (नेल्सन मंडेला)
याद रखिए कि-नकारात्मक सोच रखने से आपका आत्मविश्वास कम होगा, नकारात्मक सोच रखने से आप कोई भी अच्छा कार्य करने से डरेंगे, क्योंकि आपको लगेगा की उसका परिणाम बुरा ही होगा, नकारात्मक सोच से मानसिक तनाव हो सकता है, सोचने-समझने की क्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ता है और आप हमेशा पूर्णता चाहेंगे, जो मुमिकन नहीं है तथा आत्मविश्वास की इस कमी के कारण रिश्ते निभाने में भी मुश्किल हो सकती है।
इसलिए, सकारात्मक सोच की तरफ बढ़ने के उपाय पर अमल कीजिए-कोई भी विचार अपने मन में आने से रोकना आपके हाथ में नहीं हैं इसलिए उनके बारे में सोचना भी सही नहीं है, लेकिन नकारात्मक विचारों के बारे में क्या कर सकते हैं, सिर्फ उस बात पर ध्यान दें। हमेशा अच्छी और सकारात्मक बातों से प्रभावित हों। सकारात्मक सोच रखने वाले और खुश रहने वाले लोगों के साथ ज़्यादा से ज़्यादा साम्य-समता भाव रखें। उनके साथ ज्यादा समय बिताने से आपको ख़ुशी का एहसास होगा और वे हमेशा आपको नकारात्मक सोच से भी दूर रखेंगे। यदि आपके जीवन में ऐसे लोग हैं जो आपका मज़ाक उड़ाते हैं, या आपको निरंतर कमियां गिनाते हैं तो ऐसे लोगों का साथ छोड़ दें। ऐसे ही गलतियों को समझ उन्हें सुधारने की कोशिश करें। जीवनभर अपनी गलतियों के लिए खुद को कोसें मत।
मन में नकारात्मक विचार आने पर ध्यान उन सब बातों पर लगाएं, जो आपको सकारात्मक महसूस कराती हैं। जीवन में होने वाली अच्छी बातों के बारे में सोचें।

परिचय- डॉ.अरविन्द जैन का जन्म १४ मार्च १९५१ को हुआ है। वर्तमान में आप होशंगाबाद रोड भोपाल में रहते हैं। मध्यप्रदेश के राजाओं वाले शहर भोपाल निवासी डॉ.जैन की शिक्षा बीएएमएस(स्वर्ण पदक ) एम.ए.एम.एस. है। कार्य क्षेत्र में आप सेवानिवृत्त उप संचालक(आयुर्वेद)हैं। सामाजिक गतिविधियों में शाकाहार परिषद् के वर्ष १९८५ से संस्थापक हैं। साथ ही एनआईएमए और हिंदी भवन,हिंदी साहित्य अकादमी सहित कई संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। आपकी लेखन विधा-उपन्यास, स्तम्भ तथा लेख की है। प्रकाशन में आपके खाते में-आनंद,कही अनकही,चार इमली,चौपाल तथा चतुर्भुज आदि हैं। बतौर पुरस्कार लगभग १२ सम्मान-तुलसी साहित्य अकादमी,श्री अम्बिकाप्रसाद दिव्य,वरिष्ठ साहित्कार,उत्कृष्ट चिकित्सक,पूर्वोत्तर साहित्य अकादमी आदि हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-अपनी अभिव्यक्ति द्वारा सामाजिक चेतना लाना और आत्म संतुष्टि है।