प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’
सहारनपुर (उप्र)
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मन संवाद करूं मैं तुमसे, बंधो शिव प्रेम की डोरी से।
तुम हो एक छोटे से बालक, बंधो न जोरा-जोरी से॥
डर से नहीं बदलते हो तुम प्रेम-तर्क से बदले हो,
प्रेम के भूखे जन्म-जन्म से तड़प- कसक से बदले हो।।
तुम्हें न भय जंजीरों का, खुश होते माँ की लोरी से,
तुम हो एक छोटे से बालक, बंधो न जोरा-जोरी से…॥
प्यासी आत्मा जल को खोजे, तुम खोजो आनंद को,
हर क्षण भोग, स्वाद को बदलो पाओ न परमानंद को।
भाव समर्पित शिव भज लो, रस निकले हृदय की पोरी से,
तुम हो एक छोटे से बालक, बंधो न जोरा-जोरी से…॥
विनम्रता से समझाती मैं कहाँ भटकते रहते हो,
दे भगवान का नाम अमरता, काहे को दुःख सहते हो।
श्रद्धा-भक्ति गहरी कर लो, धीरे शिव पर चोरी से,
तुम हो एक छोटे से बालक, बंधो न जोरा-जोरी से…॥
मुझे पता है प्यारे, तुम बस प्रेम के बंधन बंधते हो,
प्रेम का चुंबक मात्र प्रभु, क्यों उनसे नहीं चिपकते हो।
दिशाहीन अब नहीं हो तुम, मत घूमो मस्त टपोरी से,
तुम हो एक छोटे से बालक, बंधो न जोरा-जोरी से…॥
शीघ्र एक दिन आएगा, शिव नाम में मौन मगन होंगे,
तन की सुथ बिसरा दोगे शिव चरणों में अरपन होंगे।
आनंदित शिव नाम का जल, मैं पियूंगी हृदय कटोरी से,
तुम हो एक छोटे से बालक, बंधो न जोरा-जोरी से…॥
लक्ष्य नहीं है तुम्हें मारना मेरी विनती तुम सुन लो,
इसी जनम मुझे शिव को पाना तुम भी उनको ही चुन लो।
शिव के दरस की चाह-राह बच निकलें माया बोरी से,
तुम हो एक छोटे से बालक, बंधो न जोरा-जोरी से…॥
माँ की तरह ही प्रीत है तुमसे, तुम मेरे प्यारे बालक,
प्रसन्न हो शिव नाम सुनाओ, शिव हैं सृष्टि के चालक।
नित्य मधु दो शिव के नाम का अपनी प्रेम सकोरी से,
तुम हो एक छोटे से बालक, बंधो न जोरा-जोरी से…॥
मन संवाद करूं मैं तुमसे बंधो शिव प्रेम की डोरी से।
तुम हो एक छोटे से बालक बंधो न जोरा-जोरी से॥